ज्येष्ठ मास में ज्येष्ठ संतानों का विवाह क्यों नहीं? मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर छ.ग.

(मनोज जायसवाल)
हिंदु धर्म में 16 संस्कार बताए गए है, इसमें विवाह संस्कार काफी महत्वपुर्ण है। हिंदु धर्म में रामनवमी,अक्ती लगन में धार्मिक मान्यता मुताबिक काफी मात्रा में शादियां होती है। यह सर्वथा विदित है कि विवाह संस्कार ग्रह नक्षत्र राशि गुर आदि मिलान के बाद की जाती है।
तारतम्य यदि हम मास केे संबंध बात करें तो ऐसा माना जाता है, कि ज्येष्ठ लड़के और ज्येष्ठ लड़की का परस्पर विवाह ज्येष्ठ मास में नहीं करना चाहिए। पुत्र के विवाह के 6 माह के भीतर पुत्री का विवाह नहीं करना चाहिए। लेकिन पुत्री का विवाह करने के बाद पुत्र का विवाह कभी भी किया जा सकता है।
परंपरागत विवाह में जहां काफी सारी बातों को मदृेनजर रखा जाता है, वहीं प्रेम विवाह में ऐसा कुछ नहीं देखा जाता। ऐसा सुना भी नहीं जाता कि प्रेम विवाह में कुण्डली मिलायी जाती है। हां प्रेम विवाह को अरेंज मैरिज का रूप दें तो माने न माने लेकिन मानने वाले जरूर कुण्डली दिखाते हैं।
गुण एवं कुण्डली मिलान यह दो अलग बातें है। जिन्हें अमुमन एक मान लिया जाता है। हिंदु पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ चंद्रमास का तीसरा महीना होता है। अंग्रेजी कलेण्डर के मुताबिक यह मई जुन में पडते हैं।
ऐसा समय भी आता है जब ज्येष्ठ मास की अवधि दो मास के बराबर होने की बात कही जाती है। विवाह परंपरा में बहुत सारे नियम और परंपराएं मानने वालों के लिए है। जो नहीं मान रहा उसके लिए कुछ नहीं कहा जा सकता। लेकिन अमूमन हिंदू धर्म में ना सिर्फ वैवाहिक आयोजन अपितु जीवन के कई शुभ कार्य पूर्व जरूर मुर्हूत देखी जाती है।


















