आप भी टूट कर ना जाएं मंदिर! श्री मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)
(मनोज जायसवाल) – जब यह माना जाता है कि टूटी चीजों से नकारात्मक उर्जा आती है। अमूमन टूटी हुई चीजों के तारतम्य खासकर किसी मुर्ति का जरा भी खंडित होना शुभ नहीं माना जाता। तब दीपावली पूजन अवसर पर नियम…
”रग रग में साहित्य कला संगीत” श्री मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर(छ.ग.)
(मनोज जायसवाल) -अहम भाव आ जाने के चलते शायद वो भी उसी श्रेणी में आ जाते हैं,जो खुद बोला करते थे कि राजनीति काफी गंदी है, नेता बनने के बाद खुद के लोग नहीं पहचानते। दुनिया का ऐसा कोई आदमी…
”दुष्टप्रवृत्तियों के अंत का पर्व विजय दशमी” श्री अशोक कुमार पटेल शिक्षक,साहित्यकार मेघा,धमतरी(छ.ग.)
साहित्यकार-परिचय – अशोक कुमार पटेल “आशु” माता– पिता : श्रीमती तेरस पटेल,श्री पुष्कल प्रसाद पटेल जन्म – १७/०६/१९७१ तुस्मा,शिवरीनारायण शिक्षा – एम.ए.हिंदी,समाज शास्त्र,कैरियर गाइडेन्स में स्नातक,बी.एड./डी.एड. प्रकाशन–१.हौसले की ऊँची उड़ान २०२०-२१ (कविता संकलन) २.अंतर्मन की पुकार२०२१-२२ (बाल-कहानी संकलन) ३.मेरी अभिव्यक्ति…
”नवरात्रि पर सेवा के विविध स्वरूप” श्री मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर (छ.ग.)
(मनोज जायसवाल) -मॉ के दर्शन को मानवता की सेवा में रोपवे बड़ा कदम है। नवरात्रि पर्व नौ दिनों का पवित्र पर्व है, पर इस पवित्र पर्व की रौनकता और छाप चहुं दिशा में देखने मिलती है। नौ दिनों तक शक्ति…
”माता सेवा के प्रतीक जस जोत जवांरा नवरात्रि परब” श्री अशोक पटेल “आशु” साहित्यकार मेघा‚धमतरी(छ.ग.)
(अशोक पटेल “आशु”) हमर छत्तीसगढ़ म नवरात के विशेष महत्व होथे। ए परब के आय म हमर राज के जम्मों देवी मंदिर म उछाह आ जाथे। हमर छत्तीसगढ म देवी माता मन के अलग–अलग नाम अउ उनकर दिन के अलग–अलग…
”लोकरंग अर्जुंदा टूट कर जुडने का श्रेष्ठ उदाहरण” श्री मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)
छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध रंगकर्मी बालोद के अर्जुंदा निवासी इसी लोकरंग अर्जुंदा के संस्थापक दीपक चंद्राकर ने आज एक निजी अस्पताल में इस जीवन को अलविदा कह दिया। उन्होंने छ.ग. की लोककला को पूरे देश में सम्मान दिलाया। दाऊ रामचंद्र देशमुख…
”स्त्री को ध्वेय रख,परोसी जाती रही अश्लीलता” श्री मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)
(मनोज जायसवाल ) कालांतर में जिस प्रकार हमारी भारतीय सिने कला जगत में चलचित्रों का स्वर्णिम इतिहास रहा, आधुनिक काल के रास्ते में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर कई चलचित्रों में अश्लीलता परोसी गई जो वर्तमान तक आम से…
‘पहनावा..! अभिभावकों की भुमिका अहम’ मोनिका शर्मा वरिष्ठ साहित्यकार, मुंबई महाराष्ट्र
(मोनिका शर्मा) यह प्यारी सी बच्ची बीते दिनों एक कार्यक्रम में दिखी | ध्यान खींचा इसके फुलकारी दुपट्टे और सलवार-सूट ने ।पोस्ट में तस्वीर इस बिटिया की है पर यह बात बेटे-बेटी दोनों के लिए कह रही हूँ- अभिभावक…
”कपडे सफेद रहे पर स्याह ना रहे” मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)
-साहित्य हस्ती के नाम अपनी पहचान भी बनाने अमादा हैं, तो आधुनिक वस्त्रों पर फिल्मी गानों पर ठुमके भी (मनोज जायसवाल) कपडों का असर तो निश्चित रूप से पडता है,तभी धार्मिक,आध्यात्मिक के साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ही अंतिम…
‘छत्तीसगढ़ की अनूठी पुरौनी परंपरा’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर (छ.ग.)
– छत्तीसगढ़ के हाट बाजारों में अतिरिक्त देने की परंपरा आज भी जीवित। (मनोज जायसवाल) आज की स्थिति में देश के सबसे प्रगतिशील अथाह संपदाओं को समेटे प्रदेश कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ की पुण्य धरा में आम लोक जीवन में…























