आलेख

”युवाओं को शिक्षा पर विशेष रुचि लेना चाहिए” दिलेश्वर बाजपेयी (अधिवक्ता) साहित्यकार दुर्ग छ.ग.

(दिलेश्वर बाजपेयी)
आज जिस समुदाय परिवार में या कहाँ जाये जिस देश राज्य में हो पूरे समूचे में विश्व में शिक्षा को ही उत्तम और विशेष दर्जा दिया जाता है। आजकल युवा साथियों में पढ़ाई की रुचि न्यूनतम होती जा रही है। पढ़ाई जिस स्तर से हमकों करना चाहिए उस स्तर से नहीं कर पा रहे है।

वर्तमान समय में युवा अपने मनमर्जी से स्वतंत्र रूप से शिक्षा दीक्षा की ओर रूचि हटाकर अन्य किसी विशेष कार्याे में रूचि लेते हैं जिससे परिजन खुश नहीं रहते है। आधुनिक युग में एक से बढ़कर एक टेक्नोलॉजी मशीन यंत्रों उपकरण का अपने दैनिक जीवन में प्रायः प्रायः हम सभी अधिक रूप में अपना कीमती समय गवा देते हैं। जिसका दुष्प्रभाव हमारे शिक्षा स्तर पर पड़ता है।

जिस पर बेहतर ढंग से तन मन धन से समर्पित भाव से पढ़ाई करते हैं उसमें हमारा जो परिणाम जो है वह संतोषजनक नहीं रहता है। मेरा विशेष मानना है कि – पूरे युवा साथी अपने पढ़ाई के स्तर पर शत प्रतिशत जरूरी काम के अलावा अन्ययंत्र समय पर समय नहीं गंवाना चाहिए जिससे हमको हमारे परिणाम विपरीत प्रभाव ना पड़े किशोरों उस पर हमको हमारे घर परिवार में बुजुर्गों का अपने माता-पिता का व रिश्तेदारों का मान सम्मान करना चाहिए और हमें की आदतें संस्कार को अपने अंदर आत्मसात करना चाहिए वह अपने कार्य के प्रति ईमानदारी के साथ निर्भर एवं आत्मविश्वास होना चाहिए।

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