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धमतरी में कवि पवन प्रेमी के काव्य संग्रह ’’कर्ण हूं मैं’’ का भव्य विमोचन

(मनोज जायसवाल)
-संघर्ष की प्रेरणा देता एवं आत्मा से निकली कविता है – डॉ. गिरीश पंकज

धमतरी (सशक्त हस्ताक्षर)। जिला हिंदी साहित्य समिति, धमतरी के तत्वावधान में साहित्य भवन, म्युनिसिपल स्कूल के पीछे स्थित सभागार में हिंदी एवं छत्तीसगढ़ी के प्रतिष्ठित कवि पवन प्रेमी के काव्य संग्रह ’’कर्ण हूं मैं’’ का विमोचन समारोह बड़े साहित्यिक गरिमा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में देश के प्रख्यात व्यंग्यकार एवं सद्भावना दर्पण के संपादक डॉ. गिरीश पंकज मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

साथ ही चर्चित कवि  द्रोण सार्वा, बीजापुर से पधारी उपन्यासकार श्रीमती ओमेश्वरी देवांगन एवं जिला हिन्दी साहित्य समिति के अध्यक्ष डुमन लाल ध्रुव मंचासीन रहे। मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और माल्यार्पण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। आमंत्रित अतिथियों का सम्मान शाल, श्रीफल एवं पुष्पगुच्छ भेंटकर किया गया। तत्पश्चात काव्य संग्रह ’’कर्ण हूं मैं’’ का औपचारिक विमोचन किया गया।

विमोचन उपरांत कवि पवन प्रेमी ने अपनी प्रतिनिधि रचनाओं का भावपूर्ण काव्यपाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी कविताओं में सामाजिक संवेदनाओं, मानवीय मूल्यों और जीवन के गहन अनुभवों की सजीव झलक दिखाई दी। समारोह में अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए डुमन लाल ध्रुव ने पवन प्रेमी की रचनाओं में निहित संवेदनात्मक शक्ति एवं सृजनात्मकता की सराहना की। उन्होंने कहा कि ’’कर्ण हूं मैं’’ समकालीन कविता के स्वर और समय के सवालों को बेहद ईमानदारी से अभिव्यक्त करता है।

पुस्तक विमोचन कार्यक्रम कार्यक्रम के मुख्य अतिथि देश के प्रख्यात व्यंग्यकार एवं सद्भावना दर्पण के संपादक डॉ. गिरीश पंकज ने विमोचित कृति कर्ण हूं मैं में संभावना दृष्टि दिखाई देती है। विलुप्त होती चीजों का वर्णन है। मध्यम वर्ग की पीड़ा का उल्लेख है। समाज जो नहीं कहता है वह साहित्यकार कहता है। कविता भाषा में आकर अपनी दृष्टि, नजरिया विचार को उद्गार व्यक्त करने का माध्यम है। आगे उन्होंने यह भी कहा कि कवि पवन प्रेमीजी की कविता को आसानी से समझा जा सकता है। हमारी व्यवस्था पर ,विषमता पर लिखी गई कविता है। गजानंद माधव मुक्तिबोध, डॉ. राम मनोहर लोहिया की साहित्य का उदाहरण देते हुए बताया कि हमें आधुनिकता की दौड़ में पीछे भी देखने भूलना नहीं चाहिए। रहीम, तुलसी, रसखान, निराला सब ने नवाचार किया है। कबीर ने उस दौर के विसंगतियों को आधार लेकर फटकारा है।उनकी कविताओं को पढ़ने से प्रेरणा मिलेगा। कर्ण हूं मैं संघर्ष की प्रेरणा देता है। आत्मा से निकली हुई कविता है।

 

कार्यक्रम में द्रोण सार्वा ने कहा- संघर्षपूर्ण जीवन में जीने की प्रेरणा देती है। कर्ण हूं मैं जीवन के यथार्थ ,चार पैर वाला खटिया ,रेत की सलवटें, संगठन पर जोर दिए हैं, संघर्ष करने का संदेश दिया है। गांव का चित्रण है,जीवन्त वर्णन है । इच्छा शक्ति पर मजबूती का एहसास कराया । वंचित लोगों के उत्थान पर ग्राम्य जीवन के यथार्थ , सहजता ,भावबोध का वर्णन है। वे संघर्ष के प्रति विद्रोह का शंखनाद किया सदैव आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है। उपन्यास लेखिका श्रीमती ओमेश्वरी देवांगन ने कहा- छप्पर से टपकती बूंदें,आंसू है उस गरीब की,लटकती तुमा साहसिक कविता है बीजापुर की हर आवाज,डराती क्षण में उनकी दयनीय स्थिति को बड़ी चालाकी से वर्णन किया है।

 

 चन्द्रशेखर शर्मा ने कहा – श्री पवन प्रेमी की काव्य कृति कर्ण हूं मैं कर्ण की नीयति को दर्शाता है। भाव प्रदर्शित होता है । कवि ने कलम चलाई जो रोजमर्रा के जीवन पर आधारित है। श्रीमाझी अनंत ने कहा कवि न छोटा होता है न बड़ा होता है। पाठक हर बार पढ़ता है समाज में प्रभाव छोड़ता है। वहीं कवि बड़ा होता है । कवि की चाहत है हर घर परिपूर्ण हो, सखी हो, अभाव से ग्रस्त न हों, वंचित न हो ,सर्व सुलभ हो कवि सहृदयता का परिचय दिया है। रेत की सलवटें अच्छी कविता है जो मुक्त छंद की आधुनिक कविता है। सचिव डॉ. भूपेन्द्र सोनी एवं दीपचंद भारती ने अभिनंदन पत्र का वाचन किया। कार्यक्रम का संचालन कवयित्री श्रीमती कामिनी कौशिक ने गरिमामयी अंदाज में किया और अंत में आभार प्रदर्शन जिला हिन्दी साहित्य समिति के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सरिता दोशी ने किया।

 

इस अवसर पर मदन मोहन खंडेलवाल, डॉ. चन्द्रशेखर चौबे, नरेश चंद्र श्रोती, राजेन्द्र प्रसाद सिन्हा, कुलदीप सिन्हा, विनोद रणसिंग, चन्द्रहास साहू, रामकुमार विश्वकर्मा,सुरेश साहू,तारिक बेदार, मोहम्मद शाह, जे. एल. साहू,साहिर, मोहम्मद रिजवान, शैलेंद्र चेलक, भूपेन्द्र मानिकपुरी, रामसिंग मंडावी, लोकेश साहू, संकेत, योगेश्वर सिन्हा, प्रकाश साहू, देवेन्द्र वर्मा, पवन चंदन, होमेश्वर चन्द्राकर, खेमराज, आकाश, माधुरी मार्कण्डेय, अनुसुइया सिन्हा , सुश्री प्रीति ध्रुव, नगर के पत्रकार एवं साहित्य-प्रेमी उपस्थित रहे।

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