मुहीम सशक्त हस्ताक्षर 24 वीं कडी श्री अजय(पप्पू)मोटवानी‚कांकेर(छ.ग.)
(मनोज जायसवाल)
-मरते दम तक करूंगा समाजसेवा‚ अजय की जुबानी उन्हीं की कहानी
समाज में समाजसेवा के कई क्षेत्र है‚जिस पर अपनी ऊर्जा लगाकर किया जा सकता है। लेकिन निःस्वार्थ भाव के साथ जिनके पग आगे बढते हैं, यह निश्चित रूप से समाजसेवा का स्वरूप है। निश्चित रूप से ऐसे व्यक्तियों में उनके गुणों में खासियतें होती है। किसी ने सच ही कहा है

उसके खारेपन में भी कोई तो कशिश जरूर होगी
वर्ना क्यू जाकर सागर से यूूं गंगाजल मिले।
कांकेर नगर के ऊर्जावान,सहज,सरल,मिलनसार और सबके साथी अजय पप्पू मोटवानी पर बिल्कुल सटीक बैठती है।
अजय मानते हैं, कि समाजसेवा जैसे नेक कार्यों के क्षेत्र में आप सक्रिय हैं तो हमेशा उंगलियॉं भी उठेंगी,कई दफा आपका जो हितैषी है वह भी आलोचना करेगा। यह भी स्वीकार करते हैं कि सामाजिक एवं समाजसेवा के कार्यों का उद्धेश्य मन की संतुष्टि होता है,जिसके लिए बहुत कुछ सहना होता है,लेकिन आत्मसंतुष्टि से बढ़ कर जीवन में और कुछ भी नहीं है। आईये हम मुहीम सशक्त हस्ताक्षर जो कि प्रतिभाओं की जीवनगाथा लेखन के क्षेत्र में हमारी राष्ट्रीय मुहीम है, के अंतर्गत जानते हैं कि छत्तीसगढ़ के उत्तर बस्तर कांकेर के जानेमाने समाजसेवी अजय पप्पू मोटवानी को जिनका पूरा जीवन समाजसेवा को समर्पित है….

जन्म- अविभाजित मध्यप्रदेश काल में जिला बस्तर के कांकेर मुख्यालय में 26 जून 1972 को निज निवास राजापारा में हुआ।
शिक्षा- बालक अजय की शिक्षा दीक्षा कांकेर मुख्यालय में हुई। प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा नगर के मध्य स्थित प्रेक्टिसिंग स्कूल में हुई इसके साथ हायर सेकेण्डरी की परीक्षा उन्होंने शासकीय ग्राम भारती हायरसेकेण्डरी स्कूल से पास की। महाविद्वालयीन शिक्षा शासकीय भानुप्रतापदेव महाविद्वालय कांकेर में हुआ।
सेवाकाल- देश की आजादी के बाद से सीधे कांकेर पहूंचे अजय मोटवानी का पूरा परिवार राजापारा में बस गया। नगर के मुख्यमार्ग पर इनके बडे पिताजी घुमणमल तथा दादा जिनका नाम धनक राम था,जिनके संयुक्त नाम पर घुमणमल धनक राम नाम से छोटी सी दुकान खोली गई जो आज 74 वर्षों उपरांत भी उसी समय स्थान पर तमाम सामानें कई वस्तुओं के एजेंसी के साथ समुचित दरों पर लोगों को सेवा दी जा रही है।
वर्ष 1996 में शिक्षाकाल में शिक्षा पूरी होते ही अजय पप्पू मोटवानी अपने बडे भैया राधाकृष्ण मोटवानी के साथ पूरी तरह व्यवसाय को सम्हालने लग गए। व्यवसाय में पूरी तरह सफलता मिली। इस दरम्यां इनके दुकान में सबसे अदभुत बात आज भी रहा है कि अतीत में आजादी के बाद से खोले गए पेटियां एवं रेक आज भी दुकान के नीचे तल में रखी हुई है। राधाकृष्ण मोटवानी जो कि अजय के बडे भाई हैं छत्तीसगढ चेम्बर ऑफ कामर्स में उपाध्यक्ष के पद पर अपनी सेवा दे रहे हैं।

समाजसेवा की प्रेरणा
निश्चित रूप से किसी नेक कार्य की प्रेरणा अमूमन दुःखों से शुरू होती है। आज समाजसेवा के क्षेत्र में जिस प्रकार से अजय पप्पू मोटवानी का नाम एक स्थापित नाम बन चुका है,इस कार्य के पीछे भी एक बडा दर्द रहा है।
एक समय बड़ी बहन का स्वास्थ्य खराब होने से उन्हें खुन की जरूरत पडी। इस अतीत काल में लोग अपना खुन देने कतराते थे। अपनी बहन को बचाने के लिए इन्होंने दर-दर की ठोकरें खायी। बहन को बी पाजीटिव गुप चाहिए था, जो कि परिवार में किसी का उक्त ग्रुप नहीं था। अदद रूप से किसी तरह एक व्यक्ति खुन देने तैयार तो हुआ पर उन्होंने कठिन शर्त रख दी। जहां ब्लड प्रदाता ने कहा कि ठीक है वो खुन तो देंगे उनके ग्रुप का लेकिन बदले में जरूरतमंद को ओ पाजीटिव खुन देना पडेगा। किसी तरह उनकी शर्त मानकर अजय ने व्यवस्था की।

लेकिन इन्हीं कठिन क्षणों में उन्होंने संकल्प भी लिया कि अब उन्हें अपने आजीविका के कार्यों के साथ जो भी समय मिलेगा वो मानवता की सेवा में कार्य करेंगे। बहन के लिए खुन की व्यवस्था कर जीवनदान देने वाले अजय ने समाजसेवा के क्षेत्र में जो कार्य दिखे उसके लिए तत्पर दिखे। नगर के जिला अस्पताल में उन्होंने यहां के एक मरीज की मृत्यु के बाद पहला अंतिम दाह संस्कार सरोना मुख्यालय में किया। तब से आज तकरीबन 19 साल हो गए तकरीबन 141 लावारिश लाशों का अंतिम संस्कार सिर्फ अपने बुते करते हुए अजय अजेय बन चुके हैं। जिन परिजनों के पास अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं होते उनके लिए पैसे ही नहीं भौतिक रूप से खुद जाकर सारा खर्च उठा कर दुःखी परिजनों को ढांढस बधाते चलते रहे,इस भाव के साथ कि आपके कोई हो, ना हों पर अजय हमेशा रहेगा।
मानवता की सेवा में पूरी तरह समर्पित अजय जो आज भी पूरी दमदारी के साथ अजेय है, की प्रेरणा 82 वर्षीय मॉं श्रीमती माेहिनी बाई तथा बडी माँ श्रीमती कमलाबाई भी है,जिनके आशीर्वाद और जोश जज्बा प्रशंसा इन्हें हिम्मत देती है।

वर्ष 2007 में जन सहयोग समाजसेवी संस्था के नाम संगठन बनाकर पर्यावरण के क्षेत्र में निरंतर कार्य की कीर्ति केंद्र तक संदेश जाने के चलते इन्हें ग्रीन ट्रिब्यूनल कांकेर का प्रतिनिधि बनाया गया है। पर्यावरण के नाम इनका ही प्रयास रहा कि कांकेर की जीवनधारा सुख चुकी, गंदगियों से पटी दूध नदी के उद्वार के लिए निरंतर कार्य किया गया।
दूध नदी की रक्षा के लिए दूध नदी बचाओ अभियान चला कर स्वयं लगे रहे अपितु इसकी रक्षार्थ लोगों का ध्यान भी खींचा। दूधनदी के उद्गम क्षेत्र मलांजकुडूम से लेकर सरंगपाल तक साईकिल यात्रा की जिसका नगरवासियों में बेहतर प्रतिसाद देखने मिला। यही नहीं मलांजकुडूम से कांकेर नगर तक पैदल यात्रा भी संगठन के सदस्यों के साथ किया‚ जहां अजय चलते रहे और कारवां बनता गया।
दूधनदी को बचाने के लिए नेक कार्य का ही प्रतिसाद देखने मिल रहा है, कि देर सही राजनीतिक महात्वाकांक्षा भी सशक्त हुई और अंततः नदी के रक्षार्थ निःस्वार्थ रूप से आगे आए। आज नदी तट को बचाने रिटर्निंग वाल का कार्य हो रहा है,यह वाल बारिश में असमय आने वाली बाढ़ से तो नगर की रक्षा करेगी साथ ही नगर की गंदगीयुक्त सीवरेज जल जो नदी में गिरायी जाती है,उसकी भी अन्यत्र व्यवस्था होने के चलते नदी प्रदुषित होने से बचायी जा सकती है।

पुरस्कार-
अजय पप्पू मोटवानी अपने शिक्षाकाल से ही नेक कार्याें के लिए सम्मानित होते रहे हैं। उनकी उपब्धियों में
1. एशियन डायमंड इंटरनेशनल अवार्ड-2023
2. समता साहित्य समिति अकादमी नागपुर द्वारा सम्मान।
3. इंडोनेशिया सरकार द्वारा समाजसेवा सम्मान हेतु बाली आमंत्रण-2023
4. समता साहित्य अकादमी द्वारा डॉ. अब्दुल कलाम सम्मान।
5. इंडो-मलेशिया फ्रेंडशिप इंटरनेशनल अवार्ड-2018 यह सम्मान 25 दिसंबर 2018 को क्वालालम्पुर मलेशिया में प्रदान किया गया है।
राष्ट्रीय सम्मान की फेहरिस्त में
1. छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट युनियन रायपुर द्वारा प्रशस्ति पत्र-2019
2. छत्तीसगढ़ 24 घंटे चैनल रायपुर द्वारा प्रशस्ति पत्र-2011
3. अ.भा. विकलांग चेतना परिषद, आजीवन सदस्यता साहित्य सम्मान-2018-19
4. राज्य स्तरीय मानसगान प्रतियोगिता सम्मन-2018-2019
5. नेहरू युवा केन्द्र द्वारा प्रशस्ति पत्र एवं 10‚000 की राशि से वर्ष 2007 में सम्मान।

अन्य राष्ट्रीय सम्मान में
1. बिजनेस एचीवर्स(छत्तीसगढ़)सम्मान
(फिल्मकार/समाजसेवी सोनूसुद द्वारा-2023
2. वसुंधरा अवार्ड(उपासना फाउन्डेशन दुर्ग 2022)
3. कोरोना वारियर्स सम्मान,कांकेर 26 जनवरी 2022
4. मुख्यमंत्री के हाथों एक्सीलेन्स अवार्ड, बंसल न्यूज चैनल द्वारा।
5. भारतीय सिन्धू समाज द्वारा युवानेता सम्मान 24 मई 2018
6. मुख्यमंत्री के बस्तर प्रवास पर सम्मान-2020
7. भाजपा प्रदेशाध्यक्ष द्वारा स्वच्छता सम्मान-2022
8. गणेश शंकर विधार्थी सम्मान- 2019
9. स्वस्थ्य भारत यात्रा सम्मान, दिल्ली 2019
10. प्रजापिता ब्रम्हकुमारी विश्वविद्वालय द्वारा स्वच्छता सम्मान-2019
11. सत्य साई संगठन द्वारा पर्यावरण रक्षा हेतु सम्मान – 2018
12. सर्वधर्म सेवा समिति नगरी द्वारा समाज सेवा सम्मान-2018
13. राष्ट्रीय स्तर पर त्रि दिवसीय मानस गान प्रतियोगिता में सम्मान- 2021,22,23 में लगतार।

इस तरह लगातार कई सामाजिक‚साहित्यिक‚सांस्कृतिक मंचों पर वे सम्मानित किया जाता रहा है‚इसी कडी में इसी वर्ष 2024 में इनकी जन सहयोग संस्था को स्वच्छता हेतु गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड के सुनहरे अक्षरों में नाम दर्ज हुआ जो ना कांकेर अपितु पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। साथ ही वर्तमान में ही छत्तीसगढ धरोहर रत्न सम्मान से भी अलंकृत किया गया है।

सम्पूर्ण कांकेर जिला सहित छत्तीसगढ़ प्रदेश गर्व करता है, इस सपूत पर जो आज भी देर रात्रि 12 बजे तक कांकेर जिला चिकित्सालय में किसी जरूरतमंद मरीज जो किसी हादसे का शिकार हों,जिन्हें एम्बुलेंस या दवाई की जरूरत पडे अजय(पप्पू) हमेशा तैनात मिलते हैं। गंभीर मरीजों को स्ट्रेचर से बेड तक चढाने से लेकर डेªसिंग तक करते देखे जा सकते हैं। अजय(पप्पू) मोटवानी जरूरतमंदों के मसीहा हैं,जो आज हर किसी की जुबां पर है।


















