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सर्जना महिला साहित्य समिति का वार्षिक अधिवेशन 10 मई को

(मनोज जायसवाल)

—कलमकारों की नगरी‚ उत्तर बस्तर कांकेर में सर्जना के मंच पर आगंतुक महान साहित्यिक विभुतियाें के हाथों सम्मानित होंगी छत्तीसगढ के कलमकार। आयोजन को लेकर साहित्य कला जगत परिवार में हर्षोल्लास का वातावरण।

कांकेर(सशक्त हस्ताक्षर)। आने वाले 10 मई को छत्तीसगढ में महिला कलमकारों की जानीमानी साहित्यिक संस्था ”सर्जना महिला साहित्य समिति” कांकेर द्वारा वार्षिक अधिवेशन का आयोजन करने जा रहा है,जहां छत्तीसगढ सहित देश की नामचीन विभुतियां शिरकत करने जा रही है।यह आयोजन पूर्व की तरह ही नगर के कांकेर सिटी मॉल में आयोजित होगा। आगंतुक अतिथि साहित्य कला विभुतियों में आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’, विश्ववाणी हिन्दी संस्थान जबलपुर, हास्य व्यंग्य के कवि स्व.सुरेंद्र दुबे की धर्म पत्नी डॉ. शशि दुबे रायपुर, छत्तीसगढ के वरिष्ठ साहित्यकार,गीतकार चितरंजन कर एवं देवदास के आने की स्वीकृति संस्था को मिल चुकी है।

यह आयोजन कांकेर की डॉ. गीता शर्मा वरिष्ठ साहित्यकार एवं ज्योतिषाचार्य के निज निवास पर सम्पन्न हुई बैठक में निर्णय लिया गया है। आयोजन के संबंध में लगातार अभी बैठकों का दौर चलेगा,जिसमें नगर के अन्य साहित्यकारों बौद्विक क्षेत्र से जुडे पत्रकारों के साथ संवाद करते कार्यक्रम को मुर्तरूप दिया जा रहा है।यह बताना लाजिमी होगा कि वैसे तो कांकेर साहित्य एवं कला की नगरी है। साहित्य क्षेत्र में अतीत गवाह है,यहां के कलमकारों की कलम की गुंज राष्ट्रीय पटल पर चर्चा का विषय बनी। गौरतलब कि आजादी की लडाई के बाद जब संविधान निमात्री समिति का गठन किया गया तो यहां के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जो कलमकार भी थे,ने अहम भुमिका निभायी है।

बीते दो दशक में जैसा कि साहित्य पाठन एवं गतिविधियों की कमी हुई,उसमें कांकेर भी अछूता नहीं रहा। बावजूद इसके आज भी बौद्विक पत्रकारिता के क्षेत्र में कई बेहतर श्कलमकारश्,पत्रकार,कवि,लेखक ने कांकेर ने पहचान कायम रखी। सबसे खुबसूरती की बात कि विश्व पटल पर अपना नाम दर्ज कराने वाली भारत की बेटी कहलाने वाली डॉ. गीता शर्मा जैसे साहित्यकार के आधार स्तंभ जिन्हें आज यहां का साहित्य परिवार नगर माता का दर्जा देता है।

नगर में सर्जना साहित्य समिति की स्थापना कर साहित्य को सिंचित,संवर्धित करने में डॉ. गीता शर्मा के साथ अनेक नाम है,जिनके कई साहित्यिक संकलन उपलब्ध है। सर्जना मंच द्वारा प्रत्येक वर्ष वार्षिक अधिवेशन किया जाता रहा है,जिसमें सिर्फ और सिर्फ महिलाएं ही शामिल होती है। यहां कई वे पुरूष जिन्होंने छत्तीसगढ से दूर राष्ट्रीय स्तर पर विशेष योगदान देकर साहित्य कला में प्रसारित करने वाले साधकों को भी अलंकृत किया जाता रहा है। संभवतया इसी महीने आखिर में सर्जना महिला साहित्य समिति का यह आयोजन हो।

इस वर्ष सर्जना महिला साहित्य मंच के आयोजन में सबसे ज्यादा गौरवान्वित करने वाला क्षण होगा कि देश की जानीमानी कवयित्री महादेवी वर्मा के भतीजे आचार्य संजीव वर्मा सलिल का मुख्य आतिथि के रूप में कांकेर आगमन होने जा रहा है,जिनके हाथों छत्तीसगढ के विभुतियों का कांकेर की धरा पर सम्मान होते हुए अपने को धन्य मानेंगे।

सनद रहे, कलमकारों की कलम से सुशोभित कांकेर की इस धरा के हम भी साहित्य से जुडे होकर बौद्विक पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने मित्रों को जुडने का आव्हान करते रहे हैं। आज की रोजमर्रा में जब चहुंओर द्वेश,क्लेश का वातावरण सा निर्मित है,ऐसे में लोगों को आत्मिक शांति,सुकून यदि मिल सकता है,तो वह साहित्य एवं कला जगत से ही संभव है।

कलमकारों में हौसला बना रहे, अपने कर्तव्य पथ पर अग्रसर हों इन विषयों को स्वयं आत्मसात करते हुए निवेदन है कि आईये आप भी हमारे द्वारा अखिल भारतीय स्तर पर संचालित एकमात्र वेब पोर्टल चैनल सशक्त हस्ताक्षर के साथ जुड कर साहित्य की रचनाओं एवं कला,समाजसेवा के साथ अपनी सहभागिता दर्ज करायें। सशक्त हस्ताक्षर द्वारा साहित्य एवं कला जगत के साथियों के लिए पिछले कई वर्षों से निरंतर कदम से कदम मिलाकर उनकी जीवनयात्रा पर आलेखों, रचनाओं का साहित्यिक जीवन परिचय के साथ लगातार प्रकाशन करते आ रहा है।

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