”जय सद् गुरू” श्रीमती रानी शर्मा समाजसेविका कांकेर छ.ग.
”जय सद् गुरू” तन थका, मन हारा था। चहुँ ओर घोर निराशा था। तब,जय सद् गुरू ने संभाला था जीवन में खुशियों का फूल खिलाया था। सद् गुरू सूर्य समान। ज्ञान का उजास भरे। सूर्य जग सारा…
”जय सद् गुरू” तन थका, मन हारा था। चहुँ ओर घोर निराशा था। तब,जय सद् गुरू ने संभाला था जीवन में खुशियों का फूल खिलाया था। सद् गुरू सूर्य समान। ज्ञान का उजास भरे। सूर्य जग सारा…