परम्पराओं की गीता शर्मा कांकेर

‘परम्पराओं की नदीतमा’ डॉ.गीता शर्मा साहित्यकार,ज्योतिष मनीषी कांकेर छत्तीसगढ़

🚩 जय मां ‘परम्पराओं की नदीतमा’ परम्पराओं की गठरी बांधे, पातक कर्म से लिपट रहे। अनंत आकाश,अनंत सागर में, उड़ रहे हैं या डूब रहे। अकर्म-सुकर्म में भेद रहा न, रीति रिवाज सब भूल‌ रहे।। संस्कार प्रवाहित नदीतमा सी, गिरवी…

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