भावनात्मक डायलाग जो भूले नहीं भुलाये जा सकते (मनोज जायसवाल)

भावनात्मक डायलाग जो भूले नहीं भुलाये जा सकते श्री मनोज जायसवाल,संपादक सशक्त हस्ताक्षर छ.ग.

‘प्रेम रोग’ के एक दृश्य में जब नायिका कहती है कि उनके पैर में कांटा चुभने पर नायक द्वारा निकाले जाने का प्रयास करता है तब वह इससे स्वयं को दूर रखते अपने विधवा होने का याद दिलाती है कहती…

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