भाव खाने का नहीं भाव रखने का स्वभाव हो…
(मनोज जायसवाल) जीवनचर्या ऐसी हो गयी है कि कई लोगों में न चाहते हुए भी उनमें भाव प्रवेश कर गया है। जिसके चलते उनका स्वभाव ही भाव खाने का हो गया है। जबकि भाव रखने स्वभाव होना चाहिए। अहं रूपी…
(मनोज जायसवाल) जीवनचर्या ऐसी हो गयी है कि कई लोगों में न चाहते हुए भी उनमें भाव प्रवेश कर गया है। जिसके चलते उनका स्वभाव ही भाव खाने का हो गया है। जबकि भाव रखने स्वभाव होना चाहिए। अहं रूपी…