bhid achal bharti banka bihar

”भीड़” डाॅं.अचल भारती वरिष्ठ साहित्यकार बांका,बिहार

”भीड़” भीड़ के पास दिमाग नहीं होता बालू के शुष्क रेत की तरह होती है भीड़ भीड़ जीती है दिवालिएपन के बीच और मरती है रोज फिर बार – बार जी उठने का नाटक करती है भीड़ हर बार भीड़…

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