“छ.ग. कलमकार मंच का चतुर्थ वार्षिक सम्मेलन बिलासपुर में सम्पन्न”
(मनोज जायसवाल)
बिलासपुर(सशक्त हस्ताक्षर)। राष्ट्रीय सेवा रत्न सम्मान एवं राष्ट्रीय प्रतिष्ठा पुरस्कार प्राप्त राज्य शासन से मान्यता प्राप्त समिति – छत्तीसगढ़ कलमकार मंच का चतुर्थ वार्षिक सम्मेलन एवं सम्मान समारोह हॉटल सेफ्रॉन, पुराना बस स्टैंड के निकट टेलिफोन एक्सचेंज रोड बिलासपुर में 22 फरवरी 2026 को सम्पन्न हो गया। साहित्य के इस महा कुम्भ में प्रदेश भर के जाने-माने साहित्यकारों ने शिरकत की।

वरिष्ठ साहित्यकार एवं केन्द्रीय जेल अधीक्षक रहे राजेन्द्र रंजन गायकवाड़ के मुख्य आतिथ्य, वरिष्ठ साहित्यकार द्वय मंगत रवीन्द्र की अध्यक्षता एवं रामनाथ साहू के विशिष्ट आतिथ्य में आयोजित यह कार्यक्रम 11:30 बजे छत्तीसगढ़ महतारी एवं सन्त शिरोमणि गुरु घासीदास जी की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण से आरम्भ हुआ। प्रसिद्ध गायक दम्पत्ति हृदय प्रकाश अनन्त एवं श्रीमती किरण भारती एवं साथियों द्वारा गुरु वंदना एवं छत्तीसगढ़ महतारी की वन्दना प्रस्तुत की गई। तत्पश्चात मंचस्थ अतिथियों एवं कलमकारों का स्वागत पुष्पहार एवं गुलदस्ता भेंट कर किया गया। कार्यक्रम के आरम्भ में भारतीय संविधान की प्रस्तावना का ससम्मान वाचन कराया गया। इस अवसर मंच के संरक्षक वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गोवर्धन को 75 वसन्त पूर्ण करने पर उनके सुदीर्घ एवं यशस्वी जीवन की कामना करते हुए शाल ओढ़ाकर एवं गुलदस्ता भेंट कर स्वागत किया गया।

इसके बाद छत्तीसगढ़ कलमकार मंच के संस्थापक एवं प्रदेशाध्यक्ष डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति द्वारा मंच के वार्षिक प्रशासनिक प्रतिवेदन का वाचन किया गया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ कलमकार मंच साहित्य के प्रति समर्पित सेवकों का वो समूह है, जो साहित्य की सेवा करना अपना प्रथम कर्म एवं धर्म समझता है। अब तक 23 साझा संकलनों का प्रकाशन कर 1326 कलमकारों को सम्मानपत्र, ट्रॉफी एवं मेडल प्रदान किया जा चुका है। इसी कड़ी में आज 14 विशिष्ट हस्तियों और यू.एस.ए. सहित भारत के 101 कलमकारों को “कलमकार साहित्य शक्ति अलंकरण” प्रदान किए जाएंगे। आज 3 पुस्तकों के विमोचन के साथ विमोचित पुस्तकों की संख्या 76 हो जाएगी। यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है, जो कलमकारों के त्याग, समर्पण और सनिष्ठा से सम्भव हुआ है। छत्तीसगढ़ कलमकार मंच के तत्वावधान में “श्री निरवान शबद ग्रन्थ” लिखने तथा उन्हें प्रकाशित कराने का संकल्प व्यक्त किया गया। उन्होंने कहा कि यह न केवल सतनामधर्मियों का पवित्र ग्रन्थ होगा, वरन यह सम्पूर्ण मानव समाज के लिए भी निर्वाणकारी ग्रन्थ होगा। मंच के कामकाज के सुचारू संचालन के लिए जिला प्रशासन से भूमि आबंटित कराकर “कलमकार भवन” के निर्माण के लिए हम कृत संकल्पित हैं।

विशिष्ट अतिथि की आसंदी से सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार रामनाथ साहू ने कहा कि डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ कलमकार मंच प्रगति की राह में निरन्तर अग्रसर है। हृदय के उद्गार से वास्तविक साहित्य का सृजन होता है। मंच के सूत्र वाक्य ‘सत्य-समता-सरोकार’ में दिव्य दर्शन है। मंगत रवीन्द्र ने अध्यक्ष की आसन्दी से कलमकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ कलमकार मंच का यह आयोजन ऐतिहासिक है। साहित्यकारों के इस महाकुम्भ में आकर गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ। गिनती के कलमकार ही गद्य विधा में लेखन कर रहे हैं। अब काव्य लेखकों को इस बारे में चिन्तन कर कहानी, लघुकथा, उपन्यास, संस्मरण इत्यादि सृजन की ओर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने अपनी कहानियाँ सुनाकर सबका भरपूर मनोरंजन किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ कलमकार मंच के कार्यों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।

मंच के संरक्षक डॉ. गोवर्धन मार्शल ने प्रेरक काव्य पंक्तियाँ पढ़ते हुए कहा कि हम जैसे कलमकारों को हाथ में कलम पकड़ाने का पूरा श्रेय विश्वरत्न महामानव डॉ. भीमराव अम्बेडकर और संत शिरोमणि गुरु घासीदास बाबा को जाता है। लेकिन आज युवकों को नशापान से दूर रहकर रचनात्मक कार्य के लिए आगे आने की जरूरत है। उन्होंने जन्म के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में सम्मानित करने के लिए छत्तीसगढ़ कलमकार मंच का आभार प्रगट किया।

चायकाल पश्चात प्रसिद्ध लोक गायिका श्रीमती किरण भारती एवं डॉ हृदय प्रकाश अनन्त द्वारा द्वारा संगीत की धुन पर “गिरौदपुरी धरती चारों धाम बनगे बाबा मोर” गीत की मनभावन प्रस्तुति दी गई। तालियों की जोरदार गड़गड़ाहट से पूरा हाल गूंज उठा। पश्चात गायक देवेन्द्र मल्होत्रा द्वारा “मोर बाबा भीमराव तैहाँ संविधान ल बनाये बर” ज्ञानवर्धक एवं मनोरंजक गीत वाद्ययंत्रों की धुन पर प्रस्तुत किए गए। स्रोतागण भाव विभोर हो उठे।
वार्षिक सम्मान समारोह में तीन पुस्तकों का विमोचन हुआ। इन पुस्तकों में डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति द्वारा सम्पादित राष्ट्रीय साझा काव्य संकलन- “कलम मेरे साथी” शामिल रहे। इसमें 64 साहित्यकारों के जीवन परिचय एवं उनकी श्रेष्ठ रचनाओं का संकलन है। इसके अलावा डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति द्वारा लिखी गई 74 वीं कृति- “सतनाम धर्म और उनके पन्थ” तथा 75वीं कृति “सतनाम प्रकाश” का विमोचन भी करतल ध्वनि के बीच सम्पन्न हुआ।

मुख्य अतिथि राजेन्द्र रंजन गायकवाड़ ने अपने उद्बोधन में कहा कि डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति की अगुवाई में छत्तीसगढ़ कलमकार मंच ने जो उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है, ऐसी उपलब्धि कड़ी मेहनत, समर्पण और समन्वय से ही प्राप्त होती है। उन्होंने अपने सेवाकाल के दौरान जेल सुधार के लिए किए गए प्रयासों तथा उनके परिणामों के बारे में प्रकाश डालते हुए कहा कि अपने लिए तो हर कोई जीता है, लेकिन समाज के लिए जीने से सुख-शान्ति और हृदय को सुकून मिलता है। भारत यात्री चीनू टण्डन सिकन्दर ने अपनी भारत यात्रा के बारे में सारगर्भित अनुभव सुनाते हुए परिवार के महत्व एवं मोबाइल के बारे में धारा प्रवाह प्रेरक कविता पढ़ी।.
भोजनावकाश पश्चात डॉ. प्यारेलाल आदिले, प्राचार्य जे.बी.डी. कला एवं विज्ञान महाविद्यालय कटघोरा ने “भारतीय संविधान एक राष्ट्रीय ग्रन्थ है” विषय पर अपने चिर-परिचित अन्दाज में संक्षिप्त एवं सारगर्भित व्याख्यान देते हुए कहा कि डॉ. अम्बेडकर द्वारा रचित भारतीय संविधान में समानता, स्वतंत्रता और बन्धुत्व का संदेश है। वे न केवल बहुजनों के बल्कि सबके एकछत्र मसीहा थे। उन्होंने गरीबों, वंचितों, पिछड़ों और सबसे बढ़कर महिलाओं के अधिकारों की चिंता की। उनके द्वारा लिखे भारतीय संविधान में महात्मा बुद्ध और गुरु घासीदास के दर्शनों का समावेश है। संवैधानिक व्यवस्था सबके लिए हितकारी है। राजतंत्रीय व्यवस्था सदियों पुरानी बातें हैं, जो इक्कीसवीं सदी में पूर्णतः अनुपयोगी है।

सम्मान समारोह में साहित्य एवं कला के क्षेत्र में लोकप्रिय व्यक्तित्वों का सम्मान किया गया। राजेन्द्र रंजन गायकवाड़ को राजा गुरु बालक दास साहित्य सम्राट सम्मान, मंगत रवीन्द्र को लक्ष्मण मस्तुरिया साहित्य मनीषी सम्मान, रामनाथ साहू को ई. वी. रामास्वामी पेरियार साहित्य क्रान्ति सम्मान, सुरेश कुमार चन्द्रा को दयाराम टंडन ज्ञान रत्न सम्मान, कुमारी गरिमा पोयाम शिक्षिका को प्रथम शिक्षिका सावित्रीबाई फुले शिक्षा ज्योति सम्मान, दिलीप कुमार खोटे ‘आशु’ को नकुलदेव ढीढ़ी साहित्य भास्कर सम्मान, देवेन्द्र मल्होत्रा को डॉ. भीमराव अम्बेडकर कला कौशल सम्मान, श्रीमती किरण भारती अनन्त को ममतामयी मिनीमाता कला प्रतिभा सम्मान, पर्दाफाश के सम्पादक एवं पूर्व प्रशासनिक अधिकारी राजेन्द्र कश्यप को महात्मा ज्योतिबा फुले साहित्य प्रचार सम्मान, गंगा प्रसाद बंजारे सेवानिवृत पुलिस उप निरीक्षक तथा विजय कुमार सुरक्षित पुलिस सहायक उप निरीक्षक को संयुक्त रूप से श्री सरहस-जोधाई शौर्य सम्मान, श्रीमती कांति चौधरी सेवानिवृत्ति महिला बाल विकास पर्यवेक्षक एवं श्रीमती नम्रता वर्मा पर्यवेक्षक को संयुक्त रूप से सफुरा माता वात्सल्य शक्ति सम्मान, श्रीमती के. संध्या नेताम नर्सिंग ऑफिसर आंध्र प्रदेश को सुभद्रा माता चिकित्सा सेवा सम्मान प्रदान किये गये। इसके अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका के “वाइस ऑफ मानवता” चेनल के चीफ मेघराज सिंह सहित भारत के 101 कलमकारों को कलमकार साहित्य शक्ति अलंकरण 2026 प्रदान किए गए। इन सम्मानों के तहत प्रशस्ति पट्टिका, मेडल, अंगवस्त्र एवं सम्मानपत्र प्रदान किए गए।

कवियों द्वारा करतल ध्वनि के बीच अपनी रचनाओं की मनभावन प्रस्तुति दी गईं। इन कवियों में बेदराम जाटवर वेदांज, दिलीप कुमार खोटे, रमेश कुमार रसिय्यार, महेतरु मधुकर, जुगेश कुमार बंजारे, मोजय शंकर पटेल, डॉ. अलका यादव, कौशिल्या खुराना, हजारी लाल कुर्रे, चतुर सिंह चंचल, बुंदराम जांगड़े, श्रीमती पुष्पा सिंह, श्रीमती के. संध्या नेताम, श्रीमती उषा पाटले, नवीन कुमार कुर्रे, कार्तिक पुराण घृतलहरे, डॉ. श्यामा कुर्रे, श्रीमती लक्ष्मी डहरिया, सुरजीत क्रान्ति, तिलक तनौदी स्वच्छन्द, राजेन्द्र कश्यप, देव मानिकपुरी, राजेश कुमार बंजारे, सुरेश कुमार चन्द्रा, श्रीमती मंजुलता मेरसा, श्रीमती वसुन्धरा कुर्रे, मोहन सत्ऋषु, ऐनदास घृतलहरे, राजेन्द्र गेंदले, इत्यादि साहित्यकार शामिल हैं।

कार्यक्रम को गर्वित मातृभूमि राष्ट्रीय समाचार पत्र के प्रधान सम्पादक विजय कुमार देशलहरे, डॉ. अलका यादव प्राचार्य लोरमी कॉलेज, समाजसेवी गंगाप्रसाद बंजारे, इंजीनियर लक्ष्मीकान्त क्रान्ति, डॉ. हृदय प्रकाश अनन्त इत्यादि वक्ताओं ने भी सम्बोधित किया। इन सभी ने डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति के नेतृत्व में कलमकारों और कलाकारों को मंच प्रदान करने के लिए छत्तीसगढ़ कलमकार मंच की भूमिका की तुलना दाऊ रामचन्द्र देशमुख के चंदैनी गोंदा से करते हुए मंच के कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। नवोदित कलमकारों को आगे लाने में भी मंच के प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम का उम्दा संचालन विख्यात गायक-कवि जुगेश बंजारे धीरज ने किया तथा आभार प्रदर्शन कोषाध्यक्ष बेदराम जाटवर वेदांज ने किया। तत्पश्चात कार्यक्रम समापन की घोषणा की गई।
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