‘किसी प्रतिभा पर दोषारोपण करे तो चुप ना बैठे’ श्री मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)
-बिना प्रमाण कोई किसी प्रतिभा पर चारित्रिक आरोप लगा कर मानसम्मान को ठेस पहूंचाता है तो कानूनी कार्रवाई करें। (मनोज जायसवाल) कला संगीत जगत के साथ साहित्य पत्रकारिता जगत भी खासकर महिला वर्ग के लिए कितना संघर्षपूर्ण है, बताने की…
”श्रृंगार से ज्यादा संघर्ष की सुंदरता” श्री मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)
(मनोज जायसवाल) निश्चित रूप से जिस स्त्री की हाथों में कलम है, वह दुनिया की सबसे सुंदर स्त्री कही जा सकती है,जिसके अर्थ समंदर से है। विस्तार के लिए आपको स्वयं को पूर्ण गंभीरता से मनन करना है। लेकिन सुंदर…
”कहां गए कहानी के रूप में ज्ञान की बातें करने वाले” मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)
(मनोज जायसवाल) आप लोग किसी से आम चर्चा कर रहे हों तो कई दफा ऐसे वाक्यात आता है,जब लोग मुहावरों,कहावतों का प्रयोग करते हैं। ठीक ऐसे ही कई लोग ऐसे हैं जो चर्चाओं के दौरान सामने आने वाली समस्या का…
”वो कितना सुंदर होगा” मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)
(मनोज जायसवाल) उस ईश्वर की प्रतिमा जितना अप्रतिम,फिर ईश्वर कैसा होगा? यह बात ईश्वर पर अपितु उनकी बनाई इस संसार के मेले में एक दूसरे इंसानों पर भी एहसास के बादल छाए रहते हैं। कैसी होगी तस्लीमा,जया, जाहनवी, डॉ.मीरा,नलिनी,रश्मि,गीता‚संगीता डॉ.राखी, …
”स्त्री! अपितु पुरूष लेखकों पर भी कुदृष्टि” मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर छत्तीसगढ
(मनोज जायसवाल) आज भी किसी साहित्यकार लेखिका नारी के लिए आम ग्रामीण परिवेश की रोजमर्रा समाज में कानाफुंसी कम नहीं है। इस परिवेश में किसी विधुषी स्त्री कैसे लोगों को समझा सकती है,जहां बात करें तो वे समझे भी ना!…
”बहन पर स्नेह बनाए रखने की चाह” मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)
तीज विशेष…. (मनोज जायसवाल) अर्थ,भौतिक चकाचौंध ने भी रिश्तों की डोर को कमजोर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। भाई बहन के असीम प्यार को समेटे राखी से लेकर सदियों से मनायी जा रही तीज हरितालिका पर भी स्नेह…
”झूठे रोने वाले बाजी मार जाएंगे” श्री मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)
–जब मैं प्राण त्याग करूंगा तब इस बात की आशंका होगी कि झूठे रोने वाले सच्चे रोने रोने वालों से बाजी मार ले जाएंगे–हरिशंकर परसाई (मनोज जायसवाल) कुछ लोग इस प्रकार से चाटुकारिता में लगे होते हैं, कि खुद पर…
‘गृहस्थ’ में रहकर धर्म के रास्ते चलने का संदेश श्री मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)
मनोज जायसवाल गृहस्थ जीवन के रूप में भी अपने धर्म में रह कर अच्छा जीवन जीया जा सकता है। ऐसा ही संदेश को आत्मसात करते एवं दूसरों के लिए प्रेरणा का काम करते अमर हो गये अखिल विश्व गायत्री परिवार…
‘नयनों की सागर में,मतवाली दुनिया’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)
(मनोज जायसवाल) चाहे साहित्य जगत हो, जहां देश के साहित्यकारों ने अपने काव्य में ‘नायिका’ की आखों का विस्तार से वर्णन किया। श्रृंगार रस के कवियों ने तो अपने मुताबिक ‘नायिका’ के रूप का वर्णन करते हुए मुख्यतः उनकी ‘नयन’…
‘सत्ता के लिए सडकों में होर्डिंग’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)
(मनोज जायसवाल) सत्ता के लिए और सत्ता पाने के लिए क्या कुछ नहीं किया जाता। चाहे सामाजिक सत्ता हो या सियासी सत्ता। गरीब के घर भोजन करनाǃ यह अब नया नहीं रह गया। लोगों ने देख लिया है कि गरीब…























