‘नयनों की सागर में,मतवाली दुनिया’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)
(मनोज जायसवाल) चाहे साहित्य जगत हो, जहां देश के साहित्यकारों ने अपने काव्य में ‘नायिका’ की आखों का विस्तार से वर्णन किया। श्रृंगार रस के कवियों ने तो अपने मुताबिक ‘नायिका’ के रूप का वर्णन करते हुए मुख्यतः उनकी ‘नयन’…
‘सत्ता के लिए सडकों में होर्डिंग’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)
(मनोज जायसवाल) सत्ता के लिए और सत्ता पाने के लिए क्या कुछ नहीं किया जाता। चाहे सामाजिक सत्ता हो या सियासी सत्ता। गरीब के घर भोजन करनाǃ यह अब नया नहीं रह गया। लोगों ने देख लिया है कि गरीब…
‘इंस्टा’ पर ‘स्तन’ की गंदी प्रदर्शन मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर छ.ग.
(मनोज जायसवाल) शाब्दिक रूप से तीन गुणों से मां की रचना होती है,जिसे मातृत्व कहा जाता है। लेकिन बालीवुड के कुछ गिनीचुनी अभिनेत्रियां इसे भी भुनाने में लगी हुई है। इनकी कितनी बेशर्मी कि प्रदर्शन को आतुर दिखती है। किसी…
माँ बहादुर कलारिन स्वर्णिम अतीत के पन्ने अधुरे तो नहींॽ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर (छ.ग.)
(मनोज जायसवाल) पूरे विश्व में सहस्त्रबाहु कलार समाज के अराध्य के रूप में पूजे जाते हैं। छत्तीसगढ के बस्तर क्षेत्र में माता बहादुर कलारिन को भी समाज के लोग अतीत से पूजते आ रहे हैं। लोक प्रचलित मान्यताओं में जो…
”कुलक्षणी के नाम समाज में अपमान” मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)
(मनोज जायसवाल) स्थानीय स्तर पर समाज के सुचारू संचालन का मार्ग इतना सरल तो नहीं पर कठिन भी नहीं है। कठिन इसलिए है कि सबके विचार समान नहीं होते। लेकिन सरल इसलिए भी संभव है, कि उन विचारों को एकाकार…
”लानत है‚ऐसी समाजसेवा” मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)
(मनोज जायसवाल) संस्कृति एवं सभ्यताओं वाला देश और आधुनिक कहलाने वाले समाज के नाम हमें गर्व है, समाज में उलुल जुलूल नियमों को लागू किए जाने पर बडे भारी काम किये जाने पर भी गर्व के नाम फूले नहीं अघाते,…
‘जिंदगी में कुछ नहीं कर पाने का दुःख’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)
(मनोज जायसवाल) एक मध्यम शासकीय सेवक तो कुछ बडे ईमानदार अधिकारी भी जब सेवानिवृत्ति उपरांत अपने उसी जमीं पर आता है, तो कुछ का यही होता है कि अपनी जिंदगी तो हाय-हाय में गुजर गयी। आजीविका के दौर में जितनी…
अच्छा हो स्त्री को पैर ना छुवायें … मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)
(मनोज जायसवाल) -छत्तीसगढ में ही देखें तो शादी में बेटी और दामाद का कांस्य की थाली में पैर धोकर पानी लेते हैं ऐसे में कैसे उम्मीद की जा सकेगी कि चाची को पैर ना छुवायेंॽ फिर इस शुभ विवाह में…
”विच्छेद का निर्णय नहीं आसां” मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)
(मनोज जायसवाल) वर्तमान में समाज विकट दौर में गुजर रही है। सामाजिक सत्ता के पदाधिकारियों के रास्ते किसी तलवार के धार से कम नहीं है। सामाजिक सत्ता के लिए जरूर पंचवर्षीय कार्यकाल के निर्वाचन में जद्दोजहद प्रतियोगिता मची हो। लेकिन…
”मिनीमाता जी साक्षात् करूणा और ममता की मूर्ति” डॉ रामायण प्रसाद टण्डन वरिष्ठ साहित्यकार कांकेर छ.ग.
साहित्यकार परिचय- डॉ. रामायण प्रसाद टण्डन जन्म तिथि-09 दिसंबर 1965 नवापारा जिला-बिलासपुर (म0प्र0) वर्तमान जिला-कोरबा (छ.ग.) शिक्षा-एम.ए.एम.फिल.पी-एच.डी.(हिन्दी) माता/पिता –स्व. श्री बाबूलाल टण्डन-श्रीमती सुहावन टण्डन प्रकाशन – हिन्दी साहित्य को समर्पित डॉ.रामायण प्रसाद टण्डन जी भारत के छत्तीसगढ़ राज्य में हिन्दी…























