आलेख

‘प्रेम जिसे समाज भी नहीं तोड सकता’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)

(मनोज जायसवाल) भारत का अतीत कई ऐसी ”प्रेम” कहानियों से भरी है,जिसके नाम कसमें खायी जाती है। इतिहास गवाह इस बात का भी है,जहां बडी-बडी सियासतें हिल गई वह कहानियां आज भी अमर है,अमिट है। ना जाने भारत के इतिहास…

”शहीद गुण्डाधुर भूमकाल के जननायक” श्रीमती रश्मि विपिन अग्निहोत्री शिक्षिका साहित्यकार केशकाल जिला कोंडागांव

साहित्यकार परिचय – श्रीमती रश्मि विपिन अग्निहोत्री पिता/पति का नाम – श्री विपिन अग्निहोत्री जन्मतिथि – 23.11.1978 बलाैदाबाजार छ.ग. में। शिक्षा-  एम. ए. हिन्दी , बी.एड. प्रकाशन- विधायें जिस पर कार्य किया है- छंद मुक्त काव्य रचना, संस्मरण, लघुकथा, कहानी,…

‘धोखा उन्हें दिए‚टीसें पास रूक गयी’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)

 (मनोज जायसवाल) यह तो देने वाले की हैसियत पर निर्भर करता है, आदरणीय! कोई वफा दे जाता है,कोई उपेक्षा दे जाता है तो कोई धोखा दे जाता है। कोई उपेक्षा का दंश दे जाता है। तमाम वो चीजें अपने हैसियत…

तलाकः दंश भरी जीवन यात्रा 06 मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)

(मनोज जायसवाल) आज समाज में तलाक के केस निरंतर बढ़ते चले जा रहे हैं, जिसकी समुचित जिम्मेदारी ना केवल पत्नी की अपितु पति की भी है। क्योंकि विवाह एक सामाजिक मान्यता है और पति पत्नी गाड़ी के दो पहिए की…

‘लोक सांस्कृतिक परंपराओं के बीच’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर (छ.ग.)

(मनोज जायसवाल) -भगवान श्रीराम की आस्था के नाम निभाये जाते हैं भांजा, भांजी के पवित्र रिश्ते भांजी की शादी में पाणिग्रहण पर चरण धोकर जल पान कर छत्तीसगढ़ की लोक सांस्कृतिक परंपराओं को हम आज भी बनाये रखे हुए हैं।…

तलाकः’दंश भरी जीवन यात्रा 05 ‘ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)

(मनोज जायसवाल) सशक्त हस्ताक्षर सामाजिक सरोकार के माध्यम लगातार प्रत्येक समाज में खाका प्रस्तुत करने पर बनी हुई है। प्रत्येक समाज में तलाक के प्रकरण देखे जा रहे हैं, संबंध विच्छेद करना किसी भी दृष्टि से उचित तो नहीं है,लेकिन…

‘सामाजिक सत्ता की बानगी’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)

(मनोज जायसवाल) पांच साल के लिए सौंपी गयी सामाजिक सत्ता की उल्टी गिनती तो उस दिन से शुरू हो जाती है, जिस दिन से कामकाज ही शुरू नहीं किए वरन सत्ता ग्रहण किए थे।लोगों को तवज्जो देने की बात का…

‘संवेदनाओं में प्यार का बंधन’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)

(मनोज जायसवाल) ऐसा भी माना जाता है, कि आपका इस जन्म में किसी से घनिष्टता, लगाव कहीं ना कहीं पूर्व जन्म के अधूरे संबंधों को पूरा किए जाने के नाम होता है। वरन कभी-कभी जिनसे भौतिक रूप से मुलाकात ना…

‘यादें ही शेष रह जायेंगी’मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)

(मनोज जायसवाल) निश्चित रूप से आज सोशल मीडिया की दुनिया ऐसी हो गयी है,जब नजदीक रहते हुए भी भौतिक बातचीतों से दूर लोग मोबाईल पर उंगली फिरा रहे होते हैं। दुनिया भर के दिखावे आडंबर में डुबे कई लोग सोशल…

विकल्प के नाम आपसे संबंध तो नहीं? मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर छ.ग.

(मनोज जायसवाल) दर्द,संवेदना,अनुराग दिल वाले ही लिखते हैं, ना अपने दर्द अपितु दूसरों के दर्द पर। वरना धन,भोग,भौतिक विलासिता को ही जिन्होंने लक्ष्य बनाया है,उन्हें लिखने से क्या पाठन से भी कोई मतलब नहीं है। उन लोगों के पास एक…

error: Content is protected !!