आलेख

कांकेर में वह पत्थर मौजूद जिस पर बैठ लिखते थे, रचनाएं मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर छ.ग.

(मनोज जायसवाल) -भंडारीपारा कांकेर में आज भी वह पत्थर मौजूद जहां बैठकर लिखते थे रचनाएं। – कांकेर स्थित ऐतिहासिक नरहरदेव स्कूल में थे अध्यापक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म 27 मई, 1894, राजनांदगांव, छत्तीसगढ़, भारत में हुआ था। इनके पिता…

‘एक नहीं खुद भुगतोगे सात पीढ़ी’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर छ.ग.

(मनोज जायसवाल) अपने अहम अपनी ताकत और प्रभाव के चलते हमेशा यह ख्याल रखना कि तुम्हारे चलते किसी का भी आशियाना न टूटे। भौतिक रूप से तो और भी सोचना भी नहीं। खुद को सुरक्षित रख कर दूसरों के परिवार…

‘लालची शिक्षक को पत्नी का तलाक’हरहर शम्भू कुमार चौधरी (एम जे) मुख्य संपादक (सारांश दैनिक)राउरकेला

(हर हर शम्भु) ”समाज” में ऐसा देखने मिलता है,कि किसी व्यक्ति को यदि अचानक पैसा या पद मिल जाय तो वह कैसे उछलने लगता है,जिनके सामने दुनियां बौनी लगती है। इसके साथ ही इनकी लालसा और भी बढ जाती है …

तलाक-”बेटी आबाद रहना”मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर छ.ग.

(मनोज जायसवाल) ‘तलाक’ यानि ‘संबंध विच्छेद’ के त्वरित मामलों में जिस तरह लड़के एवं लड़की तथा परिवार के बीच भरी समाज में इस कटूता के साथ अलग होते हैं, कि उनका ये कुछ दिन का वैवाहिक संबंध महज एक ”ड्रामा”…

जो प्रेम को जानत,वो प्रेमी क्यों होय…मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर,कांकेर छ.ग.

-पति पत्नी दोस्त की तरह होना चाहिए पर……. (मनोज जायसवाल) कहना होता है कि पति पत्नी को जीवन में एक अच्छे दोस्त की तरह होना चाहिए। लेकिन यदि लोगों के कहे इस बात को लिया जाये, लेकिन समाज में ऐसा…

‘जब सती प्रथा समर्थकों का प्रार्थना पत्र अस्वीकार हुआ’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर छ.ग.

(मनोज जायसवाल) राजा राम मोहन राय के 22 मई को जन्म दिवस पर…… राजा राममोहन राय का जन्म 22 मई 1772 ई. को राधा नगर नामक बंगाल के एक गाँव में, पुराने विचारों से सम्पन्न बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ…

‘ये बंधन है,स्नेह का’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर छ.ग.

(मनोज जायसवाल) ये बंधन है भाई बहन के असीम स्नेह काǃ ये खुशियों का क्षण है, उस भविष्य का जो यह परिवार याद रखेगा। प्रथम दिन जहां मंडपाच्छादन की बेला पर पारंपरिक रूप से रस्मो परंपराएं निभायी जाती है, और…

समाज-‘रोते जीवन बिता देना दुर्भाग्य’ मनोज जायसवाल संपादक ‘सशक्त हस्ताक्षर’ कांकेर छ.ग.

रोते जन्म लेना अभिशाप नहीं रोते जीवन बिता देना दुर्भाग्य (मनोज जायसवाल) दुनिया के हर जीव उसके वर्तमान जीवन में भोग कर लेता है, चाहे कुत्ता, बिल्ली हो या अन्य सभी जीव जंतु। कई जीव जंतु की उम्र बहुत अल्प…

‘सामाजिक सत्ता,पद की लालसा के नाम’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर छत्तीसगढ़

(मनोज जायसवाल) क्या कारण है कि धार्मिक, आध्यात्मिक संगठन बहूत हद तक सफल है,लेकिन सामाजिक संगठनों की स्थिति निर्वाचन के प्रथम अधिवेशन में ही गुटबाजी,असंतोष झेलते जान पड़ती है। असंतोष का कारण लोगों के बीच यही है कि सियासी या…

बिटियाः’घर आंगन से विदाई तक’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर छत्तीसगढ

(मनोज जायसवाल) लडकी जब ‘बाबुल’ के घर होती है‚ तब उसका स्थान बेटे से भी बढकर होता है। सुदुर जगहों में समाज के अंतिम पंक्ति में भी देखें तो वह ‘परिवार’ की धुरी होती है‚ जहां वह सर्वस्व जिम्मेदारियां निभा…

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