आलेख

पेट की चिंता की क्या जरूरत? मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)

(मनोज जायसवाल) दुनिया के किसी भी जीव जंतुओं को खाने की इतनी नहीं पड़ी रहती, जितने कि आदमी को। कैसे जिस किसी काम के लिए जा रहे हों और खाने की फिक्र पहले करते हैं। कई लोग ऐसे हैं,जो बिना…

‘तलाक के नाम बना दिए मासूमों को अनाथ’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)

-जीवन में बहार लाने कथा श्रवण जरूरी। (मनोज जायसवाल) अपने पारिवारिक जीवन में बहार लाने के लिए कथा श्रवण से बढ़कर और कोई सशक्त माध्यम नहीं है। कथा श्रवण के साथ पाठन भी उतना ही महत्वपूर्ण है, लेकिन श्रवण करने…

‘वैवाहिक संस्कारों में भीड की कुरीति’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)

(मनोज जायसवाल) महानगरीय ‘शहरिया’ संस्कृति आज गावों तक आने से जिस तरह आर्थिक ढांचे को पोला कर रही है,निश्चित रूप से कहीं पुनः अतीत के वो दिन ना आए जहां हम जीवन के संस्कारों को अपने परिजनों के साथ पूरा…

”ओडिशा का प्रमुख रोजो पर्व आज” देवमनी माहतो तिलका नगर, सुंदरगढ़( ओडिशा)

 (देवमनी माहतो) रोजो पर्व आस्था और विश्वास का पर्व है। मान्यता है कि इसी दिन धरती माता रजोस्वला होती है। ज्येष्ठ महीना का अंतिम दिन मासांत आषाढ़ का प्रथम दिन संक्राती होता है। इसलिए झारखंड में रोजो पर्व को मासांत…

”राम के आदर्शाे के साथ बस्तर में लोकजीवन”मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर,कांकेर (छ.ग.)

-सम्पूर्ण बस्तर में आगंतुकों का पैर धुला कर किया जाता है‚स्वागत। (मनोज जायसवाल) कौशिल्या का मायका, राम का ननिहाल होने के चलते छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर और यहां की संस्कृति के साथ ही लोक जीवन में छाप भी पूरी तरह…

तलाक-‘घुटनभरी जीवन यात्रा’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर (छ.ग.)

(मनोज जायसवाल) प्रत्येक समाज आज तलाक यानि दाम्पत्य जीवन के संबंध विच्छेद जैसे प्रकरणों से जूझ रहा है। विडंबना कहें, या मजबूरी! कि जिन दो परिवारों का पुत्र-पुत्रियों में अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लेते,सात वचन निभायी जाने की…

क्या है,प्यार बताओ ना? मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर (छ.ग.)

(मनोज जायसवाल) ‘प्रेम’ शास्वत सत्य है। ‘प्रेम’ पर कोई काव्य,लेख,कहानी लिखकर तो कला संगीत जगत में कोई मधुर आवाजों में गाकर तो कोई प्रेम की धून बजा कर फिर कोई प्रदर्शन के स्वरूप में सिने चलचित्र पटल पर इसके साथ…

अपनत्व नहीं तो प्यार कहां? मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर छ.ग.

(मनोज जायसवाल) लाख कहें वो तो हमारे दिलों में है,कहने वाली बात ही होगी। अपनत्व का भाव तो आभासी अहसासों में ही नहीं वरन भौतिक मुलाकातों में निहीत है। कहने के नाम बड़ी-बड़ी बातें जरूर पर यह कोरी मिथ्या के…

‘रस्म अदायगी ना हो‚ दिल से हो पर्यावरण संरक्षण’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर छ.ग.

(मनोज जायसवाल) आज 5 जून सभी को याद आता है कि आज विश्व पर्यावरण दिवस है। बता दें सन् 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने स्टाकहोम (स्वीडन) में विश्व भर के देशों का पहला पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया। इसमें 119…

‘कलार समाज की नारी नेे कैकई नाम का भ्रम तोड़ा’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर (छ.ग.)

(मनोज जायसवाल) -कैकई बसती है, भैंसाकट्टा में सुमित्रा,कौशिल्या है, बहन। चारामा विकासखंड का हाराडुला गांव है मायका। कैकई सहित सुमित्रा,कौशिल्या का अद्भुत संयोग।  भगवान राम को 14 वर्ष वनवास भेजने वाली माता कैकई से पुत्र भरत मिलते हैं, तो उन्हें…

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