”सनातन पर्व एवं उसकी प्रासंगिकताएं” श्रीमती आरती जायसवाल साहित्यकार रायबरेली उ.प्र.
साहित्यकार परिचय– श्रीमती आरती जायसवाल जन्म – बिकई, बम्हनपुर, एन टी पी सी ऊंचाहार रायबरेली, उत्तर प्रदेश माता -पिता –श्रीमती फूलकली श्री कृष्णलाल जायसवाल शिक्षा – स्नातकोत्तर हिन्दी साहित्य (इलाहाबाद विश्वविद्यालय )पी.जी.डी.एन.वाय.डॉ.सी.वी.रमन यूनिवर्सिटी, छत्तीसगढ़ प्रकाशन- प्रथम प्रकाशित कृति- कहानी संग्रह,परिवर्त्तन…
‘सामंजस्यता इनसे सीखने की जरूरत’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर छ.ग.
देश के लोकप्रिय कथावाचकों के आयोजन में कथा श्रवण को पहूंचे उन जिज्ञासु और अपनी समस्या के लिए निदान के इच्छुक श्रोताओं को भरी मंच में खड़े होकर सवाल जवाब करते देखना ही एक तरह से ईश्वर के दर्शन सा…
सबकी नजर बस्तर की ओर
(मनोज जायसवाल) अब उत्कृष्ट क्वालिटी के काजू के लिए भी अपनी पहचान बना रहे बस्तर की ओर लोगों की नजरें सिर्फ सैर की ओर नहीं अपितु यहां मिलने वाली देशी खाद्व वस्तुओं की ओर भी लगी होती है। बारिश के…
बेशर्मी की हद…
(मनोज जायसवाल) कितनों को देखो जो महज कुछ लाइक कमेंट की खातिर कोई कमर हिला रहे हैं तो कोई ठुमका लगा रही है। तो कोई डायलाग के लिए हमेशा तैयार दिखते हैं। बेशर्मी की हद इतनी पार हो चुकी है…
जसगीत बगैर आराधना अधुरी
– निर्मल पानी भवानी मॉं, डाले सगुरिया के हो… (मनोज जायसवाल,कला प्रतिनिधी) छत्तीसगढ़ लोक कला जगत का अतीत जितना पुराना है,संभवतया यहां लोक कला में जसगीत। नवरात्रि पर ओजपूर्ण,कारूणिक रूप से देश की सबसे मीठी छत्तीसगढ़ी में इसके नाम आराधना…
भाव खाने का नहीं भाव रखने का स्वभाव हो…
(मनोज जायसवाल) जीवनचर्या ऐसी हो गयी है कि कई लोगों में न चाहते हुए भी उनमें भाव प्रवेश कर गया है। जिसके चलते उनका स्वभाव ही भाव खाने का हो गया है। जबकि भाव रखने स्वभाव होना चाहिए। अहं रूपी…
इस दिल के तारों से…….
(मनोज जायसवाल) हरी भरी वनस्पतियों के लदी, जंगल में कहीं कोयल की कूक,झरने की झर झर की आवाज,रंग बिरंगे पक्षियों की चहचहाहट देर शाम उल्लू की आवाजें। चाहे फुर्सत के पल हो या कामकाज का समय। उन्हें नहीं लगता कि…
कहां गए कहानी के रूप में ज्ञान की बातें करने वाले
(मनोज जायसवाल) आप लोग किसी से आम चर्चा कर रहे हों तो कई दफा ऐसे वाक्यात आता है,जब लोग मुहावरों,कहावतों का प्रयोग करते हैं। ठीक ऐसे ही कई लोग ऐसे हैं जो चर्चाओं के दौरान सामने आने वाली समस्या का…
”लीड खबर का आशय स्टैंडर्ड नहीं” मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर (छ.ग.)
आज हिन्दी दिवस पर विशेष…. (मनोज जायसवाल) -तमाम हिन्दी के मात्राओं की त्रुटियों के बावजूद लीड खबर के नाम सोशल पटल पर वायरल कर झूठी वाहवाही का प्रयास किया जा रहा है। दौर अब वह नहीं रहा जहां सुबह आंचलिक…
संस्कारवान बनाने के लिए बच्चों में जरूरी है अभाव की ‘अनुभूति’
(शिक्षक दिवस- पांच सितम्बर पर विशेष) (स्वाती सिंह) पहले एमबीए, बीटेक आदि में लगभग सभी छात्र सामान्य से कुछ ऊपर परिवारों से ही आते थे। उनमें हर वक्त स्मार्ट बने रहने की ललक भी दिखती थी, यह ललक अब भी…























