”उत्तराखंड के होली गीतों की विविधता”श्रीमती झरना माथुर, साहित्यकार,कवयित्री,गायिका देहरादून उत्तरांचल
होली एक ऐसा रंगबिरंगा त्योहार है, जिस हर धर्म के लोग पूरे उत्साह और मस्ती के साथ मनाते हैं। प्यार भरे रंगों से सजा यह पर्व हर धर्म, संप्रदाय, जाति के बंधन खोलकर भाई-चारे का संदेश देता है। इस दिन…
‘नहीं मानने वाले भी अंत में साई भक्त बने’ श्री मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर छ.ग.
बहूत निगेटिव बात करते थे ना! श्रीसत्य साई बाबा पर। कुछ चैनलों ने तो बौछार लगाई। ना जाने क्या कुछ नहीं कहा गया। मानव जीवन में भक्तों के प्रति चमत्कार की छोड़ बाहरी चमत्कारों पर अनेकानेक बातें कही गई। लेकिन…
‘लड़का क्या करता है?अब लड़के देने लगे हैं उत्तर’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर छ.ग.
किस कदर मध्यमवर्गीय परिवारों में विवाह योग्य लड़के आज विवाह के लिए लड़की की तलाश में जाते हैं तो उन्हें लड़की पक्ष वालों के यक्ष प्रश्न लड़का क्या करता है? का सामना करना पड़ता है। शासकीय सेवारत,बड़े व्यवसाय वाले तो…
‘शादी की जितनी भव्यता,दूसरी ओर जर्जर होते रिश्ते’ मनाेज जायसवाल,संपादक सशक्त हस्ताक्षर छ.ग.
जितनी आधुनिकता एवं भौतिकता की चकाचौंध में जा रहे हैं,जिस तरह जीवन की महती विवाह संस्कार के नाम शादियों का दौर चल रहा है,जहां चकाचौंध तो खूब है पर रिश्ते जर्जर हो गए है। मंहगी कार्ड और अपने ही नजदीकी…
‘बीच मजधार में जीवनसाथी का साथ’ श्रीमती झरना माथुर साहित्यकार देहरादून उत्तरांचल
इन दिनो कुछ ऐसे लोगों से मेरी बात हुई कि….. “मन में कुछ जज्वात उठे, मैनें फिर कलम उठाई, तो कागज़ पर विचार कुछ, यूँ उभर कर आये।” जीवन में जीवन साथी का बहुत महत्व होता है।जब विवाह होता है…
‘प्रेम संजीवनी है, नशा नहीं ” श्रीमती माधुरी कर वरिष्ठ साहित्यकार कवयित्री,रायपुर छत्तीसगढ़
”प्रेम संजीवनी है, नशा नहीं ” मेरे प्यार को तराजू में तौलो ना, बराबरी कभी न कर पाओगे तुम मेरे मनमोहन घनश्याम बनो, मैं राधा ही हूं। आओ सत्कर्मों के द्वारा रचनाएं मधुर मुरली बजाओ,सखी,सहेलियां आई है ना! एक बार…
लडकी से वंश की ख्वाहिश और लडके से….? श्री मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर छत्तीसगढ़
लड़की ढूंढते समय रिश्तेे स्थापित होने में तरह तरह की बातें सामने आती है। ऐसे कई लड़कों सहित अभिभावकों को देखा जा सकता है जो कई वर्षों से लड़की ढूंढ रहे होते हैं और अंतिम स्थिति में किस्मत को दोष…
भावनात्मक डायलाग जो भूले नहीं भुलाये जा सकते श्री मनोज जायसवाल,संपादक सशक्त हस्ताक्षर छ.ग.
‘प्रेम रोग’ के एक दृश्य में जब नायिका कहती है कि उनके पैर में कांटा चुभने पर नायक द्वारा निकाले जाने का प्रयास करता है तब वह इससे स्वयं को दूर रखते अपने विधवा होने का याद दिलाती है कहती…
विद्यालय में हिजाब क्यों? श्रीमती आरती जायसवाल कथाकर,समीक्षक रायबरेली उ.प्र.
कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने कहा; कि स्कूल कालेज में हिजाब और भगवा स्कार्फ का जिद नही कर सकते हैं छात्र। अगली सुनवाई 14 फरवरी को होगी। आशा है कि न्यायपालिका राष्ट्र की गरिमा और विद्यालय के अनुशासन…
अधिकार नहीं तो हम क्यों हो नाराज? श्री मनाेज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर छ.ग.
नहीं! नाराजगी की क्या बात! और फिर नाराजगी के लिए भी तो अधिकार होना चाहिए। जो तुमने किसी को दिया कहां है। आत्मीय बनना और बनाना दोनों अहम है। जिस कदर भौतिक सरोकार कम हुआ है,सोशल पर उंगली फिराये जा…






















