आलेख

‘साहित्य में आज खुलेपन का दौर विचारणीय’श्री संतोष श्रीवास्तव ‘सम’ संपादक जागाे भारत कांकेर छ.ग.

साहित्यकार परिचय- श्री संतोष श्रीवास्तव ‘सम’ जन्म- 6 सितंबर 1969 माता-पिता –स्व. श्री राजेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव, श्रीमती सुशीला देवी श्रीवास्तव, शिक्षा- एम. ए. हिंदी साहित्य, इतिहास। डीएड। प्रकाशन-कविता संग्रह-आसमां छोड़ सूरज जब चल देगा। तुम प्रतिपल हो। कहानी संग्रह–वे सौदागर…

”मेरा देश महान” सुश्री नलिनीप्रभा बाजपेयी शिक्षिका,साहित्यकार कांकेर छ.ग.

साहित्यकार परिचय-सुश्री नलिनी बाजपेयी जन्म-22.07.1961 छत्तीसगढ प्रदेश के बलाैदाबाजार  में। माता-पिता-श्रीमती दुर्गा बाजपेयी,श्री नर्मदा शंकर बाजपेयी शिक्षा–एम.ए. हिंदी,इतिहास, राजनीति शास्त्र,समाज शास्त्र प्रकाशन-प्रकाशित पुस्तकें- एकल-प्रक्रिया में सांझा संकलन-14(नवलोकांचल गीत,सरस्वती प्राथम्य,काव्य साधना,काव्य धरोहर,उम्मीद,लहर,नव्या, लघुकथा संग्रह,माँ का उत्सव, कहानी संग्रह,आदि) आकाशवाणी जगदलपुर से…

कौन थे, देवार,बसदेवा,लांझिया श्री मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर छ.ग.

  -छत्तीसगढ़ में इनके गीतों का संवर्धन बेहद जरूरी। छत्तीसगढ़ में कही जाने वाली कथा के मुताबिक देवार जाति जो राजा महाराजाओं के यहां अपनी मीठी सुरों से गायन कर मनोरंजन करते थे। कहा जाता है कि एक बार उन्हीं…

‘वो रोमांटिक फिल्मों का दौर’ और आज श्री मनोज जायसवाल,संपादक सशक्त हस्ताक्षर छ.ग.

तब के दशक की रोमांटिक फिल्मों के दौर में भले ही ऐसा लगा कि उतनी सफल नहीं रही पर बदलते वक्त के साथ आज पता चलता है कि वो फिल्में कितनी खासी थी। रोमांटिक फिल्मों के दौर में विभोर कर…

”जैनेटिक शोध” श्रीमती पुष्पलता इंगोले वरिष्ठ साहित्यकार,धमतरी छ.ग.

साहित्यकार परिचय-श्रीमती पुष्पलता इंगोले जन्म- 24 दिसम्बर 1948 श्योपुर(स्टेट ग्वालियर) म.प्र. माता-पिता – स्व. श्री जे.जी.इंगोले, स्व.श्रीमती स्नेहलता महाडीक। पति-श्री ए.आर.इंगोले(सेवानिवृत्त प्रोफेसर) शिक्षा-एम.ए.(राजनीति)बी.एड. प्रकाशन- छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल हेतु पाठ्यपुस्तक लेखन(9वीं,10वीं) सामाजिक विज्ञान,विभीन्न पत्र-पत्रिकाओं में कहानियां, निबंध एवं कविताओं का…

‘ऐसा है हमारे लोक जीवन में लोक कला’ श्री मनाेज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर छत्तीसगढ

हमका घेरी बेरी भूर भूर निहारे वो बलमा पान ठेला वाला छत्तीसगढ़ लोक जीवन के लोक कला क्षेत्र में यह वो प्रथम गीत था जो इसी लोकजीवन में पान ठेला पर सुरबद् किया गया था। तब अनुराग चाैहान दीदी ने…

कहीं हम सुखी रहने के लिए दुःखी तो नहीं हो रहे? श्री मनाेज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर छ.ग.

आधुनिकता की दौड़ में हम तेजी से दौड़ रहे हैं,जहां भौतिक सुखों से सम्पन्न हैं।सीधे शब्दों में कहें तो हम भौतिक सुख साधनों वस्तुओं से सुखी हो गए हैं। यह भी कड़वा सच है, कि सुखी होने का जितना दंभ…

”हिंदी की धूमिल होती छवि” श्रीमती झरना माथुर कवयित्री,गायिका देहरादून उत्तरांचल

हम लोग तेजी से आधुनिक युग की ओर बहे हैं। इस आधुनिकता की आंधी मे हमारे रहने का तरीका,खाने-पीने का तरीका सब बदलता जा रहा है।सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हमारी भाषा। हम लोग हिंदी भाषा को छोड़कर अंग्रेज़ी भाषा को…

भारतीय मूल की बेटियां लिख रही विदेशों से (मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर छ.ग. )

-तस्लीमा विवादग्रस्त हुई तो क्यों जानने जरूर पढेंगे साहित्य। संगीत एवं लेखन को इससे जुड़े लोग अपनी साधना मानकर चलते हैं। यही कारण है कि वे हमेशा अपने आजीविका के कार्य करते हुए भी इन क्षेत्रों में मुखर रहते हैं।…

कई प्रतिभाएं मंच तक नहीं आ पाती (मनोज जायसवाल, संपादक सशक्त हस्ताक्षर छ.ग.)

  ठीक है, छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद बहुतायत रूप से यहां के प्रतिभाओं ने अपना लोहा मनवाते अपनी उत्कृष्ट कला का प्रदर्शन किया। सब अपनी विधा का प्रदर्शन चाहते हैं। उन्हें सबसे पहले अपनी विधा को स्थान चाहिए। अर्थ…

error: Content is protected !!