‘ऐसा है हमारे लोक जीवन में लोक कला’ श्री मनाेज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर छत्तीसगढ
हमका घेरी बेरी भूर भूर निहारे वो बलमा पान ठेला वाला छत्तीसगढ़ लोक जीवन के लोक कला क्षेत्र में यह वो प्रथम गीत था जो इसी लोकजीवन में पान ठेला पर सुरबद् किया गया था। तब अनुराग चाैहान दीदी ने…
कहीं हम सुखी रहने के लिए दुःखी तो नहीं हो रहे? श्री मनाेज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर छ.ग.
आधुनिकता की दौड़ में हम तेजी से दौड़ रहे हैं,जहां भौतिक सुखों से सम्पन्न हैं।सीधे शब्दों में कहें तो हम भौतिक सुख साधनों वस्तुओं से सुखी हो गए हैं। यह भी कड़वा सच है, कि सुखी होने का जितना दंभ…
”हिंदी की धूमिल होती छवि” श्रीमती झरना माथुर कवयित्री,गायिका देहरादून उत्तरांचल
हम लोग तेजी से आधुनिक युग की ओर बहे हैं। इस आधुनिकता की आंधी मे हमारे रहने का तरीका,खाने-पीने का तरीका सब बदलता जा रहा है।सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हमारी भाषा। हम लोग हिंदी भाषा को छोड़कर अंग्रेज़ी भाषा को…
भारतीय मूल की बेटियां लिख रही विदेशों से (मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर छ.ग. )
-तस्लीमा विवादग्रस्त हुई तो क्यों जानने जरूर पढेंगे साहित्य। संगीत एवं लेखन को इससे जुड़े लोग अपनी साधना मानकर चलते हैं। यही कारण है कि वे हमेशा अपने आजीविका के कार्य करते हुए भी इन क्षेत्रों में मुखर रहते हैं।…
कई प्रतिभाएं मंच तक नहीं आ पाती (मनोज जायसवाल, संपादक सशक्त हस्ताक्षर छ.ग.)
ठीक है, छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद बहुतायत रूप से यहां के प्रतिभाओं ने अपना लोहा मनवाते अपनी उत्कृष्ट कला का प्रदर्शन किया। सब अपनी विधा का प्रदर्शन चाहते हैं। उन्हें सबसे पहले अपनी विधा को स्थान चाहिए। अर्थ…
नई दिशा देने वाली होगी, छत्तीसगढ़ी फिल्में (मनोज जायसवाल, संपादक सशक्त हस्ताक्षर छ.ग.)
2002 का दशक नवोदित छत्तीसगढ़ राज्य में सफल फिल्मों के लिए जाना जाएगा। इस दौर में जो जुनून दिखा वह अब नहीं। हालांकि 2003के दशक में कई छत्तीसगढ़ी फिल्में फलाप क्या डिब्बा बंद भी हुई । मध्यांतर में फिल्म निर्माण…
महिला पर चारित्रिक दोषारोपण उचित नहीं (मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर छ.ग. )
किसी भी महिला पर चारित्रिक दोषारोपण कर देना जितना सरल है,प्रामाणिकता की कसौटी पर सरल नहीं। न जाने समाज में किन किन गालियों से निम्न तबके तब महिलाओं को ठेस पहूंचायी जाती है। कई मामले घर परिवार तक होती…
मां अन्नपूर्णा के दिए प्रसाद का अपमान क्यों?(मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर छ.ग.)
इसे उनकी बेशर्मीयत कहें, आदत से लाचार कहें या अंतस से हम कोसते रहें कि जो शिक्षित साभ्रांत होने का दंभ भरते हैं और कईयों तो आज के सोशल मीडिया पटल पर पढते और चिंता जताते दूसरों को नसीहतें…
हमारी संस्कृति,हमारी विरासत (मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर छ.ग. )
-पैसे उड़ाती परंपराओं से दूर छ.ग. में लोक सांस्कृतिक मंच हां, हमें पता है कि छत्तीसगढ़ कला जगत के उदीयमान काल में जब नाचा पार्टी का आयोजन प्रमुखता से लोगों के मनोरंजन का साधन हुआ करता था। नाचा पार्टी में…
जिनका पूरा जीवन मानवता को समर्पित रहा..श्रीसत्य साई बाबा ( मनोज जायसवाल, संपादक सशक्त हस्ताक्षर छ.ग. )
23 नवंबर श्रीसत्य साई जन्म दिवस पर विशेष ….. प्रभावशाली आध्यामिक गुरूओं में एक श्रीसत्य साई बाबा जिनका बचपन का नाम सत्य नारायण राजू था का जन्म 23 नवंबर 1926 को हुआ था।जहां भक्त उन्हें शिरडी के साई का अवतार…






















