
– शराब नहीं पीने वाला भी पीने वालों को पीला कर खुश कर रहा है।सबसे बड़ी विडंबना महिलाओं की शराबखोरी।
शराब नहीं पीने वाला पति यदि हों तो किसी भी पत्नी के लिए जीवन में इससे बढ़कर और कोई खुशी नहीं हो सकता। महिलाओं द्वारा कई बार सोशल मीडिया पर मेरी बेटी मेरा स्वाभिमान,मेरा परिवार मेरा स्वाभिमान,साड़ी पहनने पर मुहीम के साथ ही अपने नेचुरल फोटो पर मुहीम चलाये गये हैं,जिस पर लोगों के तरह-तरह के सकारात्मक कमेंट से गदगद होते हैं,लेकिन कभी यह नहीं सुना कि शराब नहीं पीते वाला मेरा पति मेरा अभिमान ! क्या अपने पतियों से शराब जैसे व्यसन नहीं छूड़ाना चाहेंगी? जो कि आज समाज की सबसे बड़ी विसंगति है,ना जाने शराब के चलते कितने घर टूटे हैं।
जहां सात्विकता होती है, वही शुभ विचार जन्म लेते हैं। जहां जिस घर में किसी जीव की मांसाहार के नाम पर हत्या हो थालियों में किसी जीव की तड़प परोसी जाय वहां लक्ष्मी कैसे आए! और कैसे रूके….ऐसी बात नहीं कि कोई परिवार में पति शराब नहीं पीता हो तो वहां लड़ाई झगड़े पति पत्नी में नोंकझोंक न हो। लेकिन पीने वाला पति हो और पीने के बाद जहां अंग्रेजी में स्पीच करने लगे वहां पत्नी हमेशा परेशान रहेंगी।
शराब नहीं पीने वाले पति को न उनके घर परिवार में अपितु उन्हें ससुराल में भी सम्मान मिलता है। शराब पीने के ज्यादती के चलते कई दफा पति में लाख खुबियां भी होते उसे तवज्जो नहीं मिलती। कभी भी उनके जीवनचर्या में कुछ बात हो जाए तो सीधे वहां पीया होगा वाली बातें आती है।
रोजमर्रा में किस तरह शराब के चलते कई जिंदगियां खराब हुई है,कई परिवार टूटे हैं। बताने वाली बात नहीं है। किसी पत्नी के मुंह से यह सुनना कि हम अपने घर में कितने ही गरीबी से क्यों न रह रहे हों पर गर्व इस बात का है कि मेरे पति शराब नहीं पीते। यही हमारे परिवार के सुख शांति का आधार है। शायद आप भी यह शब्द सुनें तो आपको भी अच्छा लगे।
शराब की ब्रांडिग बालीवुड फिल्मों में अतीत से लेकर आज तक खूब हो रही है। ऐसा ही नहीं आंचलिक फिल्मों में भी जब त्यौहार या कोई आयोजन में उत्साह की बात हो तो शराब पहले नंबर पर आता है। सबसे बड़ी विडंबना कि बात कि जो पुरूष खुद यदि शराब नहीं पीता भी हो तो वह दूसरे पुरूष मित्रों के पीने के लिए शराब की व्यवस्था करता है। यह उनकी मजबूरी होती है। क्योंकि उनके अपने उसी से खुश होते है। वो ठान ले कि उन्होंने जब शराब मांस का त्याग किया है तो क्यों दूसरों को पीला कर पाप के भागीदार बनें? ठान लेना चाहिए कि ना वो पीते हैं,ना पीलाते हैं। लेकिन मांसाहार के साथ शराब सेवन कराना यह सब जरूरी सेवा में शामिल हो चुका है। देखा जा सकता है कि जिनके घरों में मांस और शराब से दूर हैं,उनके घरों में आगंतुकों की संख्या नगण्य सी होती है । सबसे बड़ी विडंबना की क्या बात हो सकती है कि आज आधुनिकता के इस युग में महिलाओं में शराबखोरी बढ़ रही है। जब खुद शराब के आदती हों तो वो अपने पति को क्या नसीहत दे सकती है।
दिन में दोस्ती यारी के नाम शराब पार्टी और घर में इंतजार करती पत्नी को मोबाईल पर आफिस में फाईल निपटाने या कार्य से दूसरे नगर में होने का झूठ बोलना। यह सब झूठ शराब पीने वाले की पत्नियां अच्छी तरह समझती है। जो पति शराब में डूबा रहे वह अपने परिवार में अपने बच्चों को कैसे शराब से दूर रहने की शिक्षा दे सकता है। अपितु सुदूर गावों में ज्यादती तब होती है जब पति ही नहीं पत्नी भी शराब में डुबी नजर आती है।
निचले तबके का जीवन स्तर इसलिए ऊपर नहीं उठ रहा होता कि वो जितनी मेहनत मजदूरी कर कमाते हैं,देर शाम मांस मदिरे में लुटा देते हैं। जितनी राशि का मांस और शराब सेवन कर खर्च किया जाता है,उतने में आने वाले कई दिनों तक उनकी गृहस्थी में कीचन चला करती।लेकिन एक दिन पैसे खर्च कर बाकी दिनों के लिए फिर वही भटकने और गरीबी में जीवन जीने की मजबूरी। कोई बोल दे तो हम अपने पैसे का पीते हैं का जवाब त्वरित तैयार रहता है।
इसके चलते पीने वाला कभी सड़क में दिखे तो कोई पहचान वाले भी सिर उठा कर न देखे। शराब ने समाज में लाखों जिंदगियां तबाह की है, जो शराब पीता है वह नशे के आकंठ में तो डूबा रहता है,इसके चलते पत्नी बच्चों की स्थिति भी गरीबी की आ जाती है। किसी पत्नी के लिए आज के युग में शराब नहीं पीने वाला पति उनका अभिमान है। उनका स्वाभिमान है,उनके लिए दुनियां में सबसे बड़े गर्व की बात है और होना भी चाहिए।


















