कविता काव्य

”सूरज का पता” श्री त्रिभुवन पांडेय,अखिल भारतीय साहित्यकार कवि, धमतरी छत्तीसगढ़

साहित्यकार परिचय-
स्व . श्री  त्रिभुवन पाण्डेय
जन्म- 21 नवंबर 1938
कृति- भगवान विष्णु की भारत यात्रा(व्यंग्य उपन्यास) विश्व पाॅकेट बुक दिल्ली, पम्पापुर की कथा(व्यंग्य संग्रह) श्री प्रकाशन,ए-14 आदर्श नगर,दुर्ग(छ.ग.) झूठ जैसा सच(लघु उपन्यास) सुनो सुत्रधार(गीत संग्रह) पंछी मत हंसाे (हास्य-व्यंग्य एकांकी नाटक) महाकवि तुलसी(जीवनी) ब्यूटी पार्लर में भालू(व्यंग्य संग्रह) लोकवाणी प्रकाशन दिल्ली, कागज की नाव (गीत संग्रह) लोकवाणी प्रकाषन दिल्ली,कागज की नाव(गीत संग्रह) गाओ वन पांखी(गीत संग्रह) व्यंग्य,नाटक,कविता,समीक्षा,रिपोर्ताज प्रकाशित। मोर्चा फीचर में साप्ताहिक व्यंग्य प्रकाशन। महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय वर्धा द्वारा प्रकाशित भारत की जनपदीय कविता के छत्तीसगढ का संपादन।
सम्मान- छत्तीसगढ हिन्दी साहित्य सम्मेलन,रायपुर 1988 स्मृति नारायण लाल परमार सम्मान 2005 साहित्य संगीत सांस्कृतिक मंच मुजगहन,साहित्य भूषण अलंकरण, निराला साहित्य मंडल,चाम्पा 2009 गीत साधक सम्मान जिला हिन्दी साहित्य समिति दुर्ग
सम्पर्क- सोरिद नगर,धमतरी(छ.ग.)

”सूरज का पता”  

हम सूरज की खोज में
जिन पगडंडियों से गये
आकाश में
उन पगडंडियों पर चमकती हुई

किरणों की लालिमा
मौजूद थी
हम काफी देर तक चलते रहे
लेकिन हमें नहीं मिला
अस्त हुआ सूरज

हमने आसमान से पूछा
वह चुप रहा
हमने क्षितिज से पूछा
वह चुप रहा
अंत में पूछा जब पगडंडियों से

पगडंडियों ने कहा
सूरज का रंग
और रक्त का रंग
एक दूसरे का पता जानते हैं
कभी पूछना अपने ही रक्त से

अस्त हुए सूरज का पता

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