‘धोखा उन्हें दिए‚टीसें पास रूक गयी’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)
(मनोज जायसवाल) यह तो देने वाले की हैसियत पर निर्भर करता है, आदरणीय! कोई वफा दे जाता है,कोई उपेक्षा दे जाता है तो कोई धोखा दे जाता है। कोई उपेक्षा का दंश दे जाता है। तमाम वो चीजें अपने हैसियत…
तलाकः दंश भरी जीवन यात्रा 06 मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)
(मनोज जायसवाल) आज समाज में तलाक के केस निरंतर बढ़ते चले जा रहे हैं, जिसकी समुचित जिम्मेदारी ना केवल पत्नी की अपितु पति की भी है। क्योंकि विवाह एक सामाजिक मान्यता है और पति पत्नी गाड़ी के दो पहिए की…
‘लोक सांस्कृतिक परंपराओं के बीच’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर (छ.ग.)
(मनोज जायसवाल) -भगवान श्रीराम की आस्था के नाम निभाये जाते हैं भांजा, भांजी के पवित्र रिश्ते भांजी की शादी में पाणिग्रहण पर चरण धोकर जल पान कर छत्तीसगढ़ की लोक सांस्कृतिक परंपराओं को हम आज भी बनाये रखे हुए हैं।…
तलाकः’दंश भरी जीवन यात्रा 05 ‘ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)
(मनोज जायसवाल) सशक्त हस्ताक्षर सामाजिक सरोकार के माध्यम लगातार प्रत्येक समाज में खाका प्रस्तुत करने पर बनी हुई है। प्रत्येक समाज में तलाक के प्रकरण देखे जा रहे हैं, संबंध विच्छेद करना किसी भी दृष्टि से उचित तो नहीं है,लेकिन…
‘सामाजिक सत्ता की बानगी’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)
(मनोज जायसवाल) पांच साल के लिए सौंपी गयी सामाजिक सत्ता की उल्टी गिनती तो उस दिन से शुरू हो जाती है, जिस दिन से कामकाज ही शुरू नहीं किए वरन सत्ता ग्रहण किए थे।लोगों को तवज्जो देने की बात का…
‘संवेदनाओं में प्यार का बंधन’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)
(मनोज जायसवाल) ऐसा भी माना जाता है, कि आपका इस जन्म में किसी से घनिष्टता, लगाव कहीं ना कहीं पूर्व जन्म के अधूरे संबंधों को पूरा किए जाने के नाम होता है। वरन कभी-कभी जिनसे भौतिक रूप से मुलाकात ना…
‘यादें ही शेष रह जायेंगी’मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)
(मनोज जायसवाल) निश्चित रूप से आज सोशल मीडिया की दुनिया ऐसी हो गयी है,जब नजदीक रहते हुए भी भौतिक बातचीतों से दूर लोग मोबाईल पर उंगली फिरा रहे होते हैं। दुनिया भर के दिखावे आडंबर में डुबे कई लोग सोशल…
विकल्प के नाम आपसे संबंध तो नहीं? मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर छ.ग.
(मनोज जायसवाल) दर्द,संवेदना,अनुराग दिल वाले ही लिखते हैं, ना अपने दर्द अपितु दूसरों के दर्द पर। वरना धन,भोग,भौतिक विलासिता को ही जिन्होंने लक्ष्य बनाया है,उन्हें लिखने से क्या पाठन से भी कोई मतलब नहीं है। उन लोगों के पास एक…
‘बोड़ा सहित बस्तर खाद्य चीजें राजमार्ग पर’ मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर छ.ग.
(मनोज जायसवाल) प्रति वर्ष जून में प्रथम मानसुनी बारिश के बाद से ही धूप निकलने पर बाजारों में बोड़ा बिकने आ जाता है। जी, हां इस बोडा में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन,फाईबर और विटामिन डी का प्रमुख स्त्रोत है। औषधीय…
”ना उम्र का हो बंधन” मनोज जायसवाल संपादक सशक्त हस्ताक्षर कांकेर(छ.ग.)
(मनोज जायसवाल) जहां भी प्रेम के स्वरूप का दर्शन हो, वहां द्वेश,क्लेश,विद्वेश,जलन की नजर। जीवनचर्या का यही हाल है, अपने को न देख दूसरों को देखना। प्रेम किसी एक से बंधा स्वरूप नहीं। किसी की सुंदरता,किसी की प्रतिभा प्रेम के…























